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प्रतिरोध अब पहले से कहीं ज़्यादा शक्तिशाली हो गया

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प्रतिरोध अब पहले से कहीं ज़्यादा शक्तिशाली हो गया

लेबनान के हिज़्बुल्लाह महासचिव शेख़ नईम क़ासिम ने शहीद सैयद हसन नसरुल्लाह और सैयद हाशिम सफ़ीउद्दीन के जनाज़े की आधिकारिक रस्मों के दौरान भाषण दिया उन्होंने इस ऐतिहासिक अवसर पर दुनिया भर से आए मेहमानों और सभी प्रतिभागियों को सलाम पेश किया और कहा कि आज हम एक महान अरब और इस्लामी नेता को विदाई दे रहे हैं, जो दुनिया के स्वतंत्र लोगों का प्रतिनिधित्व करते था।

,लेबनान के हिज़्बुल्लाह महासचिव शेख़ नईम क़ासिम ने शहीद सैयद हसन नसरुल्लाह और सैयद हाशिम सफ़ीउद्दीन के जनाज़े की आधिकारिक रस्मों के दौरान भाषण दिया उन्होंने इस ऐतिहासिक अवसर पर दुनिया भर से आए मेहमानों और सभी प्रतिभागियों को सलाम पेश किया और कहा कि आज हम एक महान अरब और इस्लामी नेता को विदाई दे रहे हैं, जो दुनिया के स्वतंत्र लोगों का प्रतिनिधित्व करते था।

शेख़ नईम क़ासिम ने शहीद सैयद हसन नसरुल्लाह की सराहना करते हुए कहा कि, उन्होंने प्रतिरोध को उम्मत से जोड़ा और उम्मत को प्रतिरोध से जोड़ा। वे 1989 में हिज़्बुल्लाह के कार्यकारी परिषद के अध्यक्ष बने और 1992 में महासचिव का पद संभाला, जहां वे अपनी शहादत तक बने रहे।

उन्होंने प्रतिज्ञा करते हुए कहा कि हम शहीद नसरुल्लाह के वचन पर कायम रहेंगे, चाहे हमें कितनी भी कुर्बानियां देनी पड़ें। उन्होंने ज़ोर दिया कि फ़िलिस्तीन और बैतुल मुकद्दस हमेशा उनके मिशन का केंद्र रहा और हम भी इस पवित्र उद्देश्य को आगे बढ़ाएंगे।

शेख़ क़ासिम ने इज़रायली क़ैदियों के समर्थन में कहा कि हम अपने क़ैदियों को दुश्मन के पास नहीं छोड़ेंगे और उनकी रिहाई के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग़ाज़ा के समर्थन की लड़ाई फ़िलिस्तीन की आज़ादी के प्रति हमारे विश्वास का हिस्सा है और हम इज़रायल तथा अमेरिका की नीतियों का डटकर सामना करेंगे।

शेख़ नईम क़ासिम ने ज़ोर देकर कहा कि प्रतिरोध एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है और अब इसकी रणनीति, तरीके और कार्यशैली पहले से अलग होगी। उन्होंने अमेरिका को चेतावनी दी कि, युद्ध में जो हासिल नहीं कर सके, उसे साज़िशों से भी नहीं पा सकेंगे। अमेरिका और उसके सहयोगियों को यह समझ लेना चाहिए कि हिज़्बुल्लाह कभी भी उनके दबाव में नहीं आएगा।

अंत में उन्होंने कहा,हम विलायत के अनुयायी हैं हम आयतुल्लाह ख़ुमैनी, आयतुल्लाह ख़ामेनेई, आयतुल्लाह मूसा सद्र, सैयद अब्बास मूसवी, इमाद मुग़निया, सैयद हसन नसरुल्लाह, शेख़ सफ़ीउद्दीन और जनरल क़ासिम सुलेमानी के रास्ते के राही हैं।

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