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ईरान की क्रांति, उपनिवेशवाद के ख़िलाफ़ मज़लूमों की क्रांति है

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ईरान की क्रांति, उपनिवेशवाद के ख़िलाफ़ मज़लूमों की क्रांति है

लेबनान के अहले सुन्नत आलिम-ए-दीन शेख़ अहमद क़त्तान ने इंक़िलाब-ए-इस्लामी ईरान की कामयाबी की 47वीं सालगिरह की तकरीब में शिरकत की।

लेबनान में तंजीम «क़ौलना वल अमल» के सरबराह शेख अहमद क़त्तान ने जम्हूरिया-ए-इस्लामी ईरान के दूतावास की जानिब से बैरूत के होटल «फिनीसिया» में मुनअक़िद 47वीं सालगिरह की तकरीब में हिस्सा लिया।

शेख़ क़त्तान ने अपने ख़िताब में इंक़िलाब के इंसानी और इस्लामी पहलुओं पर ज़ोर देते हुए कहा,यह इंक़ेलाब मज़लूमों और कमज़ोरों का ज़ालिमों और इस्तिकबार के ख़िलाफ़ इंक़िलाब है। यह ऐसा इंक़िलाब है जो हमेशा दुनिया भर के मज़लूमों के साथ खड़ा रहा है, ख़ास तौर पर फ़िलिस्तीन और क़ुद्स शरीफ़ के साथ, और आइंदा भी खड़ा रहेगा।

आख़िर में उन्होंने जम्हूरिया-ए-इस्लामी ईरान के इस्लामी और वहदत पैदा करने वाले मौक़िफ़, और दुनिया भर ख़ुसूसन फ़िलिस्तीन और लेबनान में मुक़ावमती तहरीकों की हिमायत में उसके मज़बूत रुख़ पर शुक्रिया और क़द्रदानी का इज़हार किया।

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