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इज़राइल के प्रचारिक साम्राज्य से डरना नहीं चाहिए

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इज़राइल के प्रचारिक साम्राज्य से डरना नहीं चाहिए

सुप्रम लीडर ने फरमाया,लोगों से डरना नहीं चाहिए, उनकी बातों से ख़ौफ़ज़दा नहीं होना चाहिए। हर अच्छे और सार्थक काम और हर अहम काम के लिए मुमकिन है कि कुछ लोगों के विरोध का सामना करना पड़े।

हज़रत आयतुल्लाहिल उज़मा सैय्यद अली ख़ामेनेई ने फरमाया ,बदलाव लाने की एक शर्त दुश्मन और दुश्मनियों से न डरना है। सर्वशक्तिमान अल्लाह ने पैग़म्बरे इस्लाम से फ़रमाया है,और आप लोगों (के ताने) से डर रहे थे हालांकि अल्लाह इस बात का ज़्यादा हक़दार है कि आप उससे डरें। (सूरए अहज़ाब, आयत-37)

लोगों से डरना नहीं चाहिए, उनकी बातों से ख़ौफ़ज़दा नहीं होना चाहिए। हर अच्छे और सार्थक काम और हर अहम काम के लिए मुमकिन है कि कुछ लोगों के विरोध का सामना करना पड़े।

आज साइबर स्पेस के दौर में मुख़ालेफ़त का रूप भी ज़्यादातर कठोर और कष्टदायक हो गया है। अगर कोई काम सही, अहम, ठोस और नपे तुले अंदाज़ में अंजाम पा रहा है तो इन बातों का ख़याल नहीं करना चाहिए। बाहरी दुश्मन की भी परवाह नहीं करनी चाहिए।

हर वो काम जो मुल्क में भलाई की ओर किया जाए, दुश्मन की ओर से उसके ख़िलाफ़ एक बड़ा मोर्चा खुल जाता है क्योंकि ये लोग इसी सोच में बैठे रहते हैं कि कहाँ से चोट पहुंचाएं, वैचारिक मैदानों में भी और व्यवहारिक मैदानों में भी।

उनका वैचारिक मोर्चा यह है कि जब भी मुल्क में कुछ अहम, सही व तार्किक फ़ैसले लिए जाते हैं ये अपने व्यापक प्रोपैगंडों से उन पर तरह तरह के सवाल खड़े कर दे और उस प्रचारिक साम्राज्य के ज़रिए जो ज़ायोनियों के हाथ में है, इन्हें दबा दे और तबाह कर दे।

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