हौज़ा ए इल्मिया के उस्ताद ने क़ुरआन-ए-करीम की हमागीर हिदायतगिरी पर ज़ोर देते हुए कहा कि क़ुरआन तमाम इंसानों के लिए एक आसमानी दावत है और ख़ुदाए मुतआल अपने बंदों को इसी किताब-ए-इलाही के ज़रिये मुख़्तलिफ़ ज़ुल्मात से निकाल कर नूर, अम्न, सलामती और सिरात-ए-मुस्तक़ीम की तरफ़ हिदायत करता है।
हौज़ा ए इल्मिया के उस्ताद ग़ुलाम हुसैन कुमैली ने कहां, क़ुरआन की एक नुमायां ख़ुसूसियत उसकी हिदायतगिरी है, जिसका तज़किरा कई आयात में हुआ है। यह हिदायत आम और फ़रागीर है; यानी ख़ुदा तमाम बंदों से चाहता है कि वह इस आसमानी दसतरख्वान पर बैठें और इसकी बरकात से फ़ायदा उठाएँ।
उन्होंने सूरह माएदा की आयत 16 का हवाला देते हुए कहा:
«يَهْدِي بِهِ اللَّهُ مَنِ اتَّبَعَ رِضْوَانَهُ سُبُلَ السَّلَامِ»
अल्लाह उसी क़ुरआन के ज़रिये उन लोगों को, जो उसकी रज़ा के तालिब हैं, सलामती और अम्न के रास्तों की तरफ़ हिदायत करता है।
इसी तरह आयत «وَيُخْرِجُهُمْ مِنَ الظُّلُمَاتِ إِلَى النُّورِ بِإِذْنِهِ» का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि ख़ुदावंद उनको मुख़्तलिफ़ तारीकियों से निकाल कर नूर की तरफ़ ले जाता है और आख़िरकार सिरात-ए-मुस्तक़ीम तक पहुँचा देता है; वह रास्ता जिसका अंजाम जन्नत और रज़वान-ए-इलाही है।
उन्होंने सूरह इसरा की आयत 9 का भी ज़िक्र किया:
«إِنَّ هَذَا الْقُرْآنَ يَهْدِي لِلَّتِي هِيَ أَقْوَمُ»
यक़ीनन यह क़ुरआन सबसे मुस्तहकम और बेहतरीन रास्ते की तरफ़ हिदायत करता है ऐसा रास्ता जो बेहतरीन मंज़िल, बेहतरीन रहबर और खुश-अंजाम नतीजे तक पहुँचाता है। और इसी आयत में अहले-ईमान व अमल-ए-सालेह करने वालों को अज्र-ए-अज़ीम की बशारत दी गई है।
हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन कुमैली ने माह-ए-मुबारक रमज़ान में क़ुरआन से उन्सियत की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा कि रमज़ान, उन्स-ए-क़ुरआन का महीना है। मोमिनीन को चाहिए कि वह महाफ़िल-ए-क़ुरआनी में शरीक हों, तिलावत करें, आयात में तदब्बुर करें और उनके तर्जुमा व मफ़ाहिम पर तवज्जोह दें।