Print this page

ईरान पर ज़ायोनी-अमेरिकी खतरे के बीच मोदी इस्राईल में, भारत किसके साथ ?

Rate this item
(0 votes)
ईरान पर ज़ायोनी-अमेरिकी खतरे के बीच मोदी इस्राईल में, भारत किसके साथ ?

ईरान के खिलाफ ज़ायोनी अमेरिकी साजिशों के चरम और ईरान पर हमले के खतरे के बीच प्रधानमंत्री मोदी तल अवीव पहुंचे हुए हैं। वह 25-26 फरवरी तक मक़बूज़ा फिलिस्तीन के सरकारी दौरे पर रहेंगे। 
साल 2017 में इस्राईल का दौरा करने वाले मोदी भारत के पहले प्रधानमंत्री बन गए थे उसके बाद ये दूसरी बार है जब वह एक बार फिर इस्राईल के दौरे पर है। 
मिडिल ईस्ट में इस्राईल-फिलिस्तीन विवाद में भारत की विदेश नीति हमेशा से फिलिस्तीनियों के समर्थन की रही है, लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार हो या नरेन्द्र मोदी की सरकार, दोनों ने भारत के स्थापित विदेश नीति से हटकर फिलिस्तीन से ज्यादा ज़ायोनी शासन को वरीयता दी है। 
मोदी शासित भारत अगर ज़ायोनी शासन को अपना मित्र देश मानता है, और वहां से सामरिक महत्व के ज़रूरी हथियार खरीदता है, तो ईरान भारत का उससे भी बड़ा स्वाभाविक पार्टनर देश रहा है। भारत किसी भी देश का खुला समर्थन या विरोध करने की स्थिति में नहीं है। 
देश में अपने वोटर्स को लुभाने और लामबंद करने के लिए सरकार चाहे जितना ज़ायोनी शासन से रिश्तेदारी निभाने का दावा करे लेकिन भूराजनैतिक परिस्थितियां बिलकुल अलग है, जिसे सरकार किसी भी कीमत पर नज़रअंदाज़ नहीं कर सकती है। भारत इस मामले में हमेशा ईरान का समर्थक रहा है। 
दूसरी तरफ इस वक़्त टैरिफ वार की वजह से भारत के रिश्ते भी अमेरिका के साथ अच्छे नहीं है। मोदी ट्रम्प को अपना जितना भी अच्छा दोस्त और लंगोटिया यार बता लें लेकिन मोदी की ट्रम्प से घाटे की दोस्ती की पोल खुल चुकी है। संसद के शीतकालीन सत्र में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार की विदेश नीति को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। 
इसलिए उम्मीद की जा रही है कि मोदी और बेंजामिन की मुलाकात और दोनों देशों के बीच कोई भी करार भरत के हित को ध्यान में रखकर ही किया जाएगा। 

Read 9 times