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नेतन्याहू की जंगी नीतियों का बुरा असर

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नेतन्याहू की जंगी नीतियों का बुरा असर

 क़ब्ज़ा किए गए फ़िलिस्तीन में लगातार युद्ध जैसे हालात, ग़ज़्ज़ा में चल रही हिंसा और आसपास के कई देशों पर इज़राइल के हमलों की वजह से इज़राइली समाज गहरे मानसिक तनाव का शिकार हो गया है। नई सर्वे रिपोर्टों के मुताबिक़ इज़राइल के लगभग एक-तिहाई लोग डर, तनाव और मानसिक बीमारियों की वजह से मनोवैज्ञानिक इलाज की ज़रूरत महसूस कर रहे हैं।

 क़ब्ज़ा किए गए फ़िलिस्तीन में लगातार युद्ध जैसे हालात, ग़ज़्ज़ा में जारी हिंसा और इलाके के कई देशों पर इज़राइली हमलों ने इज़राइली समाज को गहरे मानसिक संकट में डाल दिया है। नई सर्वे और रिसर्च रिपोर्टों के अनुसार इज़राइल के लगभग एक-तिहाई लोग मानसिक तनाव, डर और मनोवैज्ञानिक बीमारियों की वजह से पेशेवर इलाज की ज़रूरत महसूस कर रहे हैं।

अलजज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक़, इज़राइल की संस्था “मकाबी हेल्थ केयर सर्विसेज़” के हालिया सर्वे में खुलासा हुआ कि लगभग एक-तिहाई इज़राइली नागरिकों ने माना कि उन्हें मानसिक मदद और इलाज की ज़रूरत है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले तीन वर्षों में ग़ज़्ज़ा पर लगातार बमबारी, लेबनान, ईरान, सीरिया और दूसरे पड़ोसी देशों के खिलाफ इज़राइली कार्रवाइयों ने इज़राइली समाज को गहरे मानसिक तनाव और “ट्रॉमा” का शिकार बना दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार इज़राइल के रक्षा मंत्रालय ने जनवरी में बताया था कि सितंबर 2023 के बाद से इज़राइली सैनिकों में “पीटीएसडी” यानी युद्ध के कारण होने वाले मानसिक तनाव के मामलों में लगभग 40 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। साथ ही अनुमान लगाया गया है कि 2028 तक यह संख्या 180 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।

इसी तरह आत्महत्या के मामलों में भी खतरनाक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इज़राइली अख़बार “जेरूसलम पोस्ट” ने फरवरी में रिपोर्ट दी थी कि 2024 में इज़राइली सैनिकों की आत्महत्या के 78 प्रतिशत मामले ग़ज़्ज़ा, वेस्ट बैंक और लेबनान में युद्ध अभियानों से जुड़े हुए थे।

इज़राइली मनोवैज्ञानिक और पूर्व सैनिक “टोली फ्लिंट” के अनुसार इज़राइली समाज में घरेलू हिंसा, डिप्रेशन और गंभीर मानसिक तनाव लगातार बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि लोगों का अपनी सरकार, सरकारी संस्थाओं और सामाजिक व्यवस्था पर भरोसा तेज़ी से कम होता जा रहा है। उनके मुताबिक़, इससे लोगों में धोखे और असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है, क्योंकि जिन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए सरकार पर भरोसा किया था, वे अब खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं।

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