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धर्म का प्रभावी प्रचार केवल ज्ञान से नहीं, बल्कि आचरण और चरित्र से होता है

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धर्म का प्रभावी प्रचार केवल ज्ञान से नहीं, बल्कि आचरण और चरित्र से होता है

आयतुल्लाह मुहम्मद महदी शब ज़िन्दादार ने जामेअतुज़ ज़हरा (स.) के निदेशक हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अलीज़ादेह और उनके सहयोगियों से मुलाक़ात के दौरान कहा कि हौज़ा-ए-इल्मिया का मूल उद्देश्य ऐसे इंसानों का निर्माण करना है जो समाज का सही मार्गदर्शन कर सकें। इस महान उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए धर्म की गहरी समझ (तफ़क़्क़ुह) अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि लोगों को सचेत करना और धर्म का प्रचार करना भी इसी गहरी समझ पर आधारित होता है।

 ईरान के हौज़ा-ए-इल्मिया की सुप्रीम काउंसिल के सचिव आयतुल्लाह मुहम्मद महदी शब ज़िन्दादार ने इस अवसर पर हौज़ा-ए-इल्मिया की जिम्मेदारियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पवित्र क़ुरआन के अनुसार हौज़ा-ए-इल्मिया का मुख्य कर्तव्य ऐसे लोगों का निर्माण करना है जो धर्म का सही ज्ञान प्राप्त करें और फिर समाज के मार्गदर्शन तथा नेतृत्व का दायित्व निभाएँ।

उन्होंने कहा कि पवित्र क़ुरआन की आयत—

"फिर ऐसा क्यों न हुआ कि हर समूह में से कुछ लोग निकलते, ताकि वे धर्म की गहरी समझ प्राप्त करें और लौटकर अपनी क़ौम को सचेत करें।"

—इस बात को स्पष्ट करती है कि लोगों को सचेत करना, धर्म का प्रचार करना और समाज का धार्मिक मार्गदर्शन तभी प्रभावी हो सकता है, जब स्वयं प्रचारक को धर्म की गहरी समझ और सही ज्ञान प्राप्त हो।

आयतुल्लाह शब ज़िन्दादार ने कहा कि हौज़ा-ए-इल्मिया, विशेष रूप से महिलाओं के धार्मिक शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे ऐसी योग्य और उच्च चरित्र वाली हस्तियों का निर्माण करें जो ज्ञान, नैतिकता और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में समाज के लिए आदर्श बन सकें तथा इस्लामी शिक्षाओं को सही रूप में जनता तक पहुँचा सकें।

धर्म का प्रभावी प्रचार केवल ज्ञान से नहीं, बल्कि आचरण और चरित्र से होता है

उन्होंने आगे कहा कि धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक प्रशिक्षण, निष्कपटता (इख़लास), परहेज़गारी (तक़वा) और उत्तम आचरण भी विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण के मूल तत्व हैं, क्योंकि समाज में धर्म का प्रभावी प्रचार केवल ज्ञान से नहीं, बल्कि अच्छे कर्म और आदर्श चरित्र से भी होता है।

उन्होंने हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रबंधकों और शिक्षकों से आग्रह किया कि वे छात्राओं के बौद्धिक और नैतिक प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दें, ताकि भविष्य में वे इस्लामी शिक्षाओं की प्रभावी प्रचारिका तथा समाज की योग्य धार्मिक मार्गदर्शक बन सकें।

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