भारतीय सर्व धर्म संसद के राष्ट्रीय संयोजक गोस्वामी सुशील जी महाराज ने कहा है कि शहीद आयतुल्लाहिल अज़मा खामेनई से हमारी श्रद्धा किसी राजनीतिक संबद्धता के कारण नहीं है, बल्कि मानवता से उनके असाधारण लगाव के कारण है। उन्होंने कहा कि "खामेनई" वह नाम है जिसने दुनिया भर के हकपसंद इंसानों को एक मंच पर इकट्ठा कर दिया।
भारतीय सर्व धर्म संसद के राष्ट्रीय संयोजक गोस्वामी सुशील जी महाराज ने आयतुल्लाह खामेनई के शोक समारोह में भाग लेने के अवसर पर कहा कि कुछ नकारात्मक प्रचार के विपरीत आयतुल्लाह खामेनई सिर्फ अपने देश के नेता नहीं थे, बल्कि पूरी मानवता की शांति, सुकून और बेहतर भविष्य के लिए चिंतित रहते थे। वह हमेशा युद्ध के बजाय संवाद और शांति का समर्थन करते थे।
उन्होंने कहा कि किसी धार्मिक नेता को निशाना बनाकर मारना न केवल मानवीय सिद्धांतों के बल्कि युद्ध के सर्वमान्य नियमों के भी खिलाफ है। उनके अनुसार अगर आज एक धार्मिक नेता को निशाना बनाया जाए तो कल दूसरे धर्मों के नेता भी इसी खतरे से दो-चार हो सकते हैं, इसीलिए सभी एकेश्वरवादी धर्मों के मानने वाले इस दुखद घटना पर शोकाकुल हैं।
गोस्वामी सुशील जी महाराज ने अमेरिका और पश्चिमी देशों पर आलोचना करते हुए कहा कि वास्तविक महाशक्ति वह नहीं है जिसके पास केवल हथियार हों, बल्कि वह है जो दुनिया और मानवता की रक्षा करे। जो लोग शांति और मानवीय मूल्यों के लिए आवाज उठाते हैं, उन्हें मारना मानवता की पराजय का प्रतीक है।
उन्होंने युद्धों में बच्चों की शहादत और अन्य दुखद घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सब मानवीय मूल्यों के पतन का संकेत देते हैं। उनके अनुसार जो लोग मानवीय गरिमा और सम्मान के संरक्षण के लिए कार्य करते हैं, उन्हें हिंसा का निशाना बनाने के बजाय उनका समर्थन किया जाना चाहिए।
भारतीय सर्व धर्म संसद के राष्ट्रीय संयोजक ने कहा कि आयतुल्लाह खामेनई हमेशा उन लोगों का समर्थन करते थे जो मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष करते हैं और अत्याचार एवं क्रूरता के खिलाफ खड़े होते हैं। इसीलिए हम उनके विचार और सिद्धांत से प्रभावित हैं और उनके संदेश को जीवित रखने के लिए अपने प्रयास जारी रखेंगे।
उन्होंने बताया कि भारतीय सर्व धर्म संसद का प्रतिनिधिमंडल उन पहले प्रतिनिधिमंडलों में शामिल था जो शोक व्यक्त करने के लिए ईरान पहुंचा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी सरकार या राजनीतिक दल का प्रतिनिधित्व नहीं करते, बल्कि हकपसंद इंसानों का प्रतिनिधित्व करते हुए एक ऐसी शख्सियत को श्रद्धांजलि देने आए हैं जिसने पूरी जिंदगी मानवता की रक्षा के लिए समर्पित कर दी थी।
गोस्वामी सुशील जी महाराज ने ईरान और भारत के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत बनाने पर जोर देते हुए कहा कि दोनों देश सदियों पुरानी साझा सांस्कृतिक विरासत रखते हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली में स्थित ईरानी सांस्कृतिक केंद्र से उनके दीर्घकालिक संबंध हैं।
उन्होंने अपने भाषण के अंत में कहा कि आयतुल्लाह खामेनई का शांति, संवाद और मानवता-प्रेम का संदेश ही उनके जीवन का भी उद्देश्य है। 82 वर्ष की आयु में भी वे विभिन्न देशों की यात्रा करके इसी शांति के संदेश को फैला रहे हैं और आगे भी इसी मिशन को जारी रखेंगे।