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ट्रंप के पास ईरान साथ युद्ध से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा है

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ट्रंप के पास ईरान साथ युद्ध से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा है

अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन अमेरिका और इस्राईल द्वारा शुरू किए गए युद्ध में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद अपने बनाए जाल में फंस गए हैं और अब उससे निकलने का रास्ता तलाश रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई समाधान नहीं मिल रहा।

अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन अमेरिका और इस्राईल द्वारा शुरू किए गए युद्ध में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद अपने बनाए जाल में फंस गए हैं और अब उससे निकलने का रास्ता तलाश रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई समाधान नहीं मिल रहा।

ब्लिंकन ने केंटकी राज्य के डेमोक्रेटिक गवर्नर एंडी बशीर को दिए एक साक्षात्कार में कहा,ट्रंप उस स्थिति से बाहर निकलना चाहते हैं, जिसमें वह खुद को ले आए हैं। उन्होंने इससे निकलने का रास्ता खोजने की कोशिश की लेकिन वह उसे नहीं ढूंढ़ पाए।

उन्होंने आगे कहा, ट्रंप इस सच्चाई को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं कि उन्होंने खुद एक नई स्थिति पैदा कर दी है, जो इस युद्ध से पहले मौजूद नहीं थी। वह नई वास्तविकता होर्मुज़ जलडमरूमध्य है।

ब्लिंकन ने इस युद्ध को रणनीतिक दृष्टि से अमेरिका के लिए असफल बताया। उन्होंने कहा, ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति की ग़लतियों के अलावा, अमेरिकी सेना भी रणनीतिक स्तर पर यह युद्ध हार रही है। अब हम ऐसी स्थिति में हैं, जहां ऐसा लगता है कि राष्ट्रपति एक ऐसे कोने में फंस गए हैं, जहां से निकलना उनके लिए संभव नहीं है। कुछ लोग इसे ‘तनाव बढ़ने के जाल’ (Escalation Trap) का नाम देते हैं।

ब्लिंकन ने फारस की खाड़ी में मौजूदा संकट के लिए सीधे तौर पर ट्रंप के उस फैसले को जिम्मेदार ठहराया, जिसके तहत अमेरिका ईरान के परमाणु समझौते (जेसीपीओए) से बाहर निकल गया था।

उन्होंने इस फैसले को “विनाशकारी” बताते हुए कहा कि, अमेरिका की पिछली सरकारें, चाहे वे रिपब्लिकन रही हों या डेमोक्रेट, ऐसे क़दम उठाने से बचती थीं जिनसे ईरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद करने की ओर बढ़ सकता था।

उन्होंने दावा किया कि पिछली अमेरिकी सरकारें ईरान के मामले में अधिक सावधानी से काम करती थीं। ब्लिंकन ने कहा,हम जानते थे कि ईरान जिन क़दमों में से एक उठा सकता है, वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद करना है। और यदि ऐसा होता है, तो लगभग 9 करोड़ आबादी वाले ईरान के ख़िलाफ़ किसी प्रकार के जमीनी सैन्य अभियान के बिना इस जलमार्ग को दोबारा खोलना हमारे लिए बेहद कठिन होगा।

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