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इस्लाम के नाम पर बने आतंकवादी संगठन मुसलमानों के अस्तित्व के लिए खतरा हैं

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इस्लाम के नाम पर बने आतंकवादी संगठन मुसलमानों के अस्तित्व के लिए खतरा हैं

सनंदज के इमाम ए जुमआ मामोस्ता मोहम्मद अमीन रासती ने कहा कि दुनिया-ए-इस्लाम में विदेशी शक्तियों द्वारा बनाए जाने वाले हर समूह का उद्देश्य इस्लाम-ए-मोहम्मदी सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि व सल्लम की मूल और शुद्ध शिक्षाओं को नुकसान पहुँचाना होता है।

सनंदज के इमाम ए जुमआ मामोस्ता मोहम्मद अमीन रासती ने कहा कि दुनिया-ए-इस्लाम में विदेशी शक्तियों द्वारा बनाए जाने वाले हर समूह का उद्देश्य इस्लाम-ए-मोहम्मदी सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि व सल्लम की मूल और शुद्ध शिक्षाओं को नुकसान पहुँचाना होता है।

उन्होंने कहा कि आज के दौर में मुस्लिम उम्मत की स्थिरता और शक्ति का सबसे बड़ा आधार एकता है, लेकिन दुश्मन सदियों से इस एकता को तोड़ने की कोशिश कर रहा हैं। वे एक ओर भटके हुए फिरकों को खड़ा करके सुन्नी और शिया मुसलमानों के बीच फूट डालते हैं, और दूसरी ओर उन्हीं समूहों को हथियारबंद कर हिंसा फैलाते हैं। इसलिए मुसलमानों को जागरूक रहकर ऐसे गुमराह संगठनों को पनपने से रोकना चाहिए।

मामोस्ता रासती ने कहा कि इस्लाम के नाम पर अस्तित्व में आने वाले आतंकवादी संगठन, जैसे दाइश (ISIS), सुन्नी और शिया दोनों के लिए समान रूप से विनाशकारी साबित हुए हैं।

इन संगठनों ने दोनों समुदायों के लोगों का बड़े पैमाने पर कत्लेआम किया। इससे स्पष्ट है कि ऐसे समूह इस्लाम की सेवा नहीं, बल्कि उसके वास्तविक स्वरूप को बदनाम करने के लिए बनाए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि हम चाहते हैं कि इस प्रकार की भटकी हुई विचारधाराएँ और संगठन जन्म न लें, तो हमें वास्तविक इस्लाम की सही समझ विकसित करनी होगी। आज सोशल मीडिया और मीडिया युद्ध के कारण विशेष रूप से युवा पीढ़ी तक इस्लाम का सही संदेश नहीं पहुँच पा रहा है, जिससे धर्म की मनमानी और स्वार्थपूर्ण व्याख्याएँ सामने आ रही हैं।

अंत में उन्होंने कहा कि यदि मुस्लिम उम्मत कुरआन और पैग़म्बर-ए-इस्लाम (स.ल.) की बताई हुई वास्तविक एकता को अपनाए, तो दुनिया की कोई भी शक्ति मुसलमानों का मुकाबला नहीं कर सकेगी। आज मुस्लिम एकता ही बाहरी शक्तियों और उनकी साज़िशों के विरुद्ध सबसे मजबूत आधार है।

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