अहलुलबैत अ.स. विश्व सभा के महासचिव हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन रज़ा रमज़ानी ने कहा है कि अरबईन-ए-हुसैनी केवल एक ज़ियारती आयोजन नहीं, बल्कि एक महान सभ्यतागत, सांस्कृतिक और सामाजिक आंदोलन है, जिसने आशूरा के संदेश को दुनिया की स्वतंत्र अहलुलबैत अ.स. विश्व सभा के महासचिव हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन रज़ा रमज़ानी ने कहा है कि अरबईन-ए-हुसैनी केवल एक ज़ियारती आयोजन नहीं, बल्कि एक महान सभ्यतागत, सांस्कृतिक और सामाजिक आंदोलन है, जिसने आशूरा के संदेश को दुनिया की स्वतंत्र और न्यायप्रिय क़ौमों की साझा भाषा बना दिया है।
उन्होंने कहा कि अरबईन, हज़रत ज़ैनब कुबरा (स.ल.) और इमाम सज्जाद (अ.स.) के तबलीगी और जागरूकता फैलाने वाले मिशन की निरंतरता है। आज यही महान आयोजन दुनिया के सामने इमाम हुसैन (अ.स.) के आंदोलन के वास्तविक उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर रहा है।
केंद्रीय अरबईन समिति की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने अरबईन कार्यक्रमों के आयोजन में इस्लामी प्रचार समन्वय परिषद की भूमिका की सराहना की और कहा कि विभिन्न सांस्कृतिक तथा प्रशासनिक संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय ने इन आयोजनों को और अधिक प्रभावशाली बनाया है।
उन्होंने कहा कि अरबईन केवल ज़ियारत का नाम नहीं, बल्कि इस्लामी सभ्यता के पुनर्जागरण, धार्मिक जागरूकता और मानवीय मूल्यों के प्रसार का वैश्विक आंदोलन है। दुनिया के विभिन्न देशों, जातियों और धर्मों से लाखों लोगों की इसमें भागीदारी इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि इमाम हुसैन (अ.) का संदेश पूरी मानवता के लिए आशा, स्वतंत्रता और न्याय का संदेश है।
रज़ा रमज़ानी ने कहा कि अरबईन ने इस्लाम-ए-मोहम्मदी (स.ल.) की वास्तविक पहचान, मुस्लिम उम्मत की एकता और प्रतिरोध मोर्चे की सॉफ्ट पावर को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का एक ऐतिहासिक अवसर प्रदान किया है।
उन्होंने कहा कि इस महान आयोजन की क्षमताओं का मीडिया, सांस्कृतिक गतिविधियों और जन कूटनीति के क्षेत्र में पहले से अधिक उपयोग किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हज़रत ज़ैनब (स.ल.) और इमाम सज्जाद (अ.) ने कर्बला की घटना के बाद अपने ख़ुत्बों के माध्यम से आशूरा के संदेश को हमेशा के लिए जीवित रखा, उसी प्रकार आज अरबईन उस संदेश को पूरी दुनिया तक पहुँचाने का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है।
उनके अनुसार यह महान आयोजन जिहाद-ए-तबीयीन का व्यावहारिक स्वरूप है और सत्य तथा असत्य की पहचान कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि नई पीढ़ी के सामने आशूरा के दर्शन और उद्देश्य को सही रूप में प्रस्तुत करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उनके अनुसार आशूरा केवल इतिहास की एक घटना नहीं, बल्कि इस्लाम को विकृति और भटकाव से बचाने वाला निर्णायक मोड़ था। वहीं अरबईन इस सत्य को पुनः उजागर करने तथा इमामत, विलायत, न्याय और प्रतिरोध की इस्लामी विचारधारा को व्यापक रूप से फैलाने का सर्वोत्तम अवसर है।
रज़ा रमज़ानी ने न्याय को इस्लाम-ए-ग़दीरी की सबसे प्रमुख सामाजिक विशेषता बताते हुए कहा कि इस्लामी क्रांति भी इसी विचारधारा पर आधारित थी, जिसका मूल उद्देश्य अत्याचार और वैश्विक अहंकारी शक्तियों का मुकाबला कर न्यायपूर्ण व्यवस्था स्थापित करना था। उन्होंने कहा कि आज अरबईन मुस्लिम उम्मत की एकता तथा प्रतिरोध मोर्चे की शक्ति और स्थिरता का उज्ज्वल प्रतीक बन चुका है।
उन्होंने अरबईन के सांस्कृतिक पक्ष को और अधिक सशक्त बनाने पर ज़ोर देते हुए कहा कि जनभागीदारी के साथ-साथ ऐसे शैक्षिक, सांस्कृतिक और मीडिया कार्यक्रम भी आयोजित किए जाने चाहिए, जो धार्मिक ज्ञान को बढ़ाएँ, आशूरा के दर्शन का प्रचार करें, इमाम हुसैन (अ.स.) के वैचारिक विद्यालय को दुनिया के सामने प्रस्तुत करें और भ्रामक प्रचार का प्रभावी उत्तर दें।