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आधुनिकी दुनिया की टेक्नोलॉजी और सीरत ए रसूल ए अकरम स.स.व.

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आधुनिकी दुनिया की टेक्नोलॉजी और सीरत ए रसूल ए अकरम स.स.व.

हुज्जतुल इस्लाम वल नुस्लिमीन मौलाना सैयद सफदर हुसैन ज़ैदी(निदेशक जामिआ इमाम जाफर सादिक अलैहिस्सलाम व सदर इमाम बारगाह, जौनपुर)

प्रस्तावना: यह विषय हमारे लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

​मोहतरम पाठकों! आज हम ऐसी दुनिया में रह रहे हैं जहाँ हर रोज़ कोई न कोई नई आज़ाद (आविष्कार) सामने आती है; आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोट, मोबाइल फोन, इंटरनेट और अनगिनत अजीब-ओ-गरीब उपकरण। इनको देखने के बाद शायद ज़ेहन में यह सवाल आता हो कि हज़रत मोहम्मद ﷺ इन नवीन आविष्कारों और वैज्ञानिक प्रगति के बारे में क्या फरमाते? क्या हमारा धर्म विज्ञान और टेक्नोलॉजी के खिलाफ है या फिर इसकी प्रेरणा देता है?

​फिलहाल इस लेख में हम कुरान मजीद, पैग़म्बर-ए-इस्लाम ﷺ की हदीसों, इतिहास-ए-इस्लाम और आधुनिक वैज्ञानिक तथ्यों की रोशनी में इन्हीं सवालों के जवाब तलाश करेंगे। हम देखेंगे कि कैसे हम आधुनिक युग में भी रसूलुल्लाह ﷺ के नक्श-ए-قدم पर चलते हुए टेक्नोलॉजी को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बना सकते हैं।

पहला अध्याय: कुरान करीम! ज्ञान और टेक्नोलॉजी की पहली किताब
​क्या आप जानते हैं कि कुरान करीम ने इंसानों को ग़ौर-ओ-फ़िक्र करने, अनुसंधान (शोध) करने और ब्रह्मांड के रहस्यों से पर्दा उठाने की बहुत अधिक प्रेरणा दी है? अल्लाह रब्बुल-इज्जत ने कुरान में बार-बार हमें आसमानों और ज़मीन में देखने और इबरत (शिक्षा) हासिल करने का आदेश दिया है।

कुरान और ज्ञान का महत्व:

​कुरान ने ज्ञान और बुद्धि को बेमिसाल मर्तबा अता किया है। अल्लाह ने २७ जगहों पर "اعلموا" (यानी जान लो) शब्द के ज़रिए लोगों को इल्म (ज्ञान) हासिल करने की दावत दी है। इल्म की क्रद-ओ-मंज़िलत इतनी ज़्यादा है कि खुदावंद-ए-आलम ने कलम और उसकी लिखावट की कसम खाई है:
न वल-क़लम...

​हज़रत अली (अ.) ने एक प्रसिद्ध कथन में इल्म को धन पर प्राथमिकता दी है और इसके कई कारण बताए हैं कि इल्म धन से बेहतर क्यों है। इससे पता चलता है कि इस्लाम में इल्म और बुद्धि हर पूँजी से अधिक कीमती है।

कुरान और नए आविष्कार:

​क्या आप जानते हैं कि कुरान ने टेक्नोलॉजी के बारे में भी बात की है? कुरान करीम उद्योग और तकनीकी कौशल को बहुत महत्व देता है, लेकिन साथ ही यह भी कहता है कि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति "हकीम" (यानी समझदार और बुद्धिमान) होना चाहिए।
अल्लाह ने इंसान को ज़मीन को आबाद करने का आदेश दिया है, जैसा कि सूरह हूद (आयत ६۱) में है:
​هُوَ أَنشَأَكُم مِّنَ الْأَرْضِ وَاسْتَعْمَرَكُمْ فِيهَا
(उसी ने तुम्हें ज़मीन से पैदा किया और तुम्हें उसकी आज़ादी/आबादी का हुक्म दिया)
​ज़मीन की आबादी इल्म और टेक्नोलॉजी के बिना संभव ही नहीं।
​युवाओं के लिए महत्वपूर्ण बिंदु: जब भी आप मोबाइल या कंप्यूटर का इस्तेमाल करें, तो याद रखें कि कुरान हमें टेक्नोलॉजी को विवेक और समझदारी के साथ इस्तेमाल करने के लिए कहता है। यह हमारा साधन है, न कि हम इसके साधन!
​दूसरा अध्याय: रसूलुल्लाह ﷺ का जीवन-पद्धति

इल्म सीखने का पूर्ण नमूना:

​नबी करीम ﷺ और इल्म की महानता
​आप ﷺ ने अपने जीवन और कथनों में ज्ञान और उत्कृष्टता की बहुत प्रशंसा की है और ज्ञान छुपाने से मना किया है। आपका प्रसिद्ध फरमान है:तलबुल-इल्म फ़रीज़तुन अला कुल्लि मुस्लिम
(इल्म हासिल करना हर मुसलमान — चाहे लड़का हो या लड़की — पर फर्ज़ है)

​इस हदीस से पता चलता है कि सीखना कोई वैकल्पिक काम नहीं कि जिसका जी चाहे पढ़े या न पढ़े, बल्कि हम सब पर अल्लाह का आदेश है।​बचपन में सीखने की प्रेरणा ​नबी करीम स.ल.व. बच्चों की शिक्षा और परवरिश को बहुत महत्व देते थे। आपका फरमान है:

मन तअल्लमा फ़ी सिबा-हु काना कान्-नक्शी फ़िल-हजर(जो व्यक्ति बचपन में कुछ सीख ले, वह पत्थर पर खुदी हुई नक्काशी की तरह होता है)​यानी बचपन और जवानी में सीखी हुई चीज़ें कभी नहीं भूलतीं।

शिक्षक और गुरु का सम्मान:

​रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:मन अल्लामा इल्मन फ़-अतम्मल्लाहु लहू अज्रहू जो व्यक्ति किसी को इल्म सिखाए, अल्लाह उसे पूरा प्रतिफल प्रदान करता है)

​यह संदेश विशेष रूप से युवाओं के लिए है कि जब कोई अच्छी बात सीखो तो उसे अपने दोस्तों और घर वालों को ज़रूर सिखाओ। यह कार्य तुम्हें अल्लाह के करीब कर देगा।

तीसरा अध्याय: इस्लाम का स्वर्णिम युग जब मुसलमान विज्ञान और टेक्नोलॉजी में सबसे आगे थे

​एक ज़माना ऐसा था कि मुसलमान ही विज्ञान और टेक्नोलॉजी में पूरी दुनिया का मार्गदर्शन कर रहे थे। इस्लामी सभ्यता के स्वर्णिम युग (पहली से दसवीं शताब्दी हिजरी) में मुसलमानों ने न केवल पिछली सभ्यताओं के ज्ञान को बचाया बल्कि नए आविष्कार करके दुनिया को हैरान कर दिया।

​मुसलमानों के महान आविष्कार ​पुस्तक "१००۱ आविष्कार: मुसलमानों की दुनिया में विरासत" के अनुसार, आज के कई आविष्कारों की जड़ें इस्लामी सभ्यता में मिलती हैं, जैसे:
​आधुनिक शल्य चिकित्सा उपकरण (सर्जिकल टूल्स) और चिकित्सा विज्ञान ​टीकाकरण (वैक्सीनेशन) ​पानी के पंप और टर्बाइन​समुद्री कंपास और नौकायन उपकरण
​गणित की अलजेब्रा शाखा (जिसे अल-ख्वारिज्मी ने विकसित किया)

​महान वैज्ञानिक जैसे इब्न अल-हैथम (प्रकाशिकी के जनक), अल-जज़री (महान इंजीनियर), इब्न सीना, ज़रिया राज़ी और ख्वारिज्मी सब मुसलमान थे, जिन्होंने कुरान और नबी ﷺ की सीरत से सबक लेकर इन महान खोजों को संभव बनाया।

​इमाम सादिक (अ.स.) और वैज्ञानिक क्रांति
​मक्तब-ए-अहल-ए-बैत (अ.) के सबसे बड़े निर्माता इमाम जाफर सादिक (अ.) हैं। उन्होंने एक महान शैक्षणिक आंदोलन चलाया जिसमें ४ हज़ार से अधिक शिष्यों ने विभिन्न विज्ञानों में महारत हासिल की।

हज़रत (अ.) ने फरमाया:अल-इल्मु सबअतुन व इश्रून हरफ़ा...
(इल्म सत्ताईस (२۷) अक्षरों पर आधारित है...)
इसका अर्थ है कि ज्ञान की कोई सीमा नहीं है, हर रोज़ नई-नई खोजें होती रहती हैं।​शिक्षा के प्रति गहरा शौक रखने वाले युवाओं के लिए संदेश: यदि आपको गणित, विज्ञान, कंप्यूटर या टेक्नोलॉजी पसंद है तो जान लीजिए कि आप भी उसी महान कारवां का हिस्सा हैं जिसने दुनिया को रोशनी प्रदान की।

​चौथा अध्याय: आज का तकनीकी युग अवसर और चुनौतियाँ (सीरत-ए-नबवी की रोशनी में)
​आज हमारे पास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट, वर्चुअल रियलिटी, न्यूक्लियर मेडिसिन और नैनो टेक्नोलॉजी जैसी अद्भुत चीज़ें हैं। हम इन्हें सीरत-ए-नबवी के अनुसार कैसे उपयोग कर सकते हैं?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कुरान:

​आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इस युग का सबसे महत्वपूर्ण आविष्कार है। कुरान की रोशनी में हम इसे कोई खतरा नहीं बल्कि अल्लाह की इबादत और इंसानों की सेवा का एक मजबूत माध्यम समझ सकते हैं।

आजकल युवा मुसलमान "कुरान की प्रदर्शनियों" में "क़ारी-ए-होशमंद" जैसे आविष्कारों से परिचय करवा रहे हैं जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से कुरान की बेहतरीन तिलावत तैयार करते हैं। इससे साबित होता है कि टेक्नोलॉजी और कुरान एक साथ चल सकते हैं।

​टेक्नोलॉजी कुरान सीखने में मददगार है​आज कई मोबाइल एप्लीकेशन मौजूद हैं जो बच्चों और बड़ों को कुरान पढ़ने, याद करने और समझने में मदद करती हैं। यह वही "ज़मीन की आबादी" है जिसका कुरान आदेश देता है।
​टेक्नोलॉजी के नुकसान (सीरत-ए-नबवी की रोशनी में)

​नबी करीम स.ल. हमेशा "संतुलन" (यानी मध्यम मार्ग) पर ज़ोर देते थे। टेक्नोलॉजी का अत्यधिक उपयोग (जैसे घंटों मोबाइल पर गेम खेलना या सोशल मीडिया देखना) नुकसानदेह साबित हो सकता है, जैसे:​शारीरिक गतिविधियों में कमी और मोटापा ​नींद का खराब होना
​परिवार और दोस्तों से दूरी

पढ़ाई और इबादत से लापरवाही:

​इसीलिए रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:ख़ैरुल उमूरी औसतुहा (सर्वश्रेष्ठ कार्य वह है जो मध्यम और संतुलित हो) ​युवाओं के लिए विशेष संदेश: टेक्नोलॉजी का आनंद लें, लेकिन इसे अपने ऊपर हावी न होने दें। आप इसके मालिक हैं, यह आपका मालिक नहीं!
पाँचवाँ अध्याय: आधुनिक युग में सीरत-ए-नबवी पर कैसे अमल करें?
​अब हम जान चुके हैं कि इस्लाम ज्ञान और टेक्नोलॉजी का समर्थन करता है। अतः आइए देखें कि हम दैनिक जीवन में नबी करीम ﷺ की सीरत पर कैसे अमल कर सकते हैं:

​इल्म हासिल करना इबादत समझें: जब आप रोज़ाना नया पाठ पढ़ते हैं तो विश्वास रखिए कि यह इबादत है। नबी ﷺ ने फरमाया कि इल्म हासिल करना नमाज़ और रोज़ा से भी उत्तम है, बस नीयत पवित्र होनी चाहिए।

​टेक्नोलॉजी को भलाई के लिए उपयोग करें: मोबाइल और इंटरनेट का उपयोग केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि नई चीज़ें सीखने, अच्छी किताबें पढ़ने और दोस्तों की मदद करने के लिए करें।

​ग़ौर-ओ-फ़िक्र करना न भूलें: जब कोई नया आविष्कार देखें तो सोचिए कि यह कैसे काम करता है? क्या इसका उपयोग सही है? यही सोच आपको समझदार और बुद्धिमान बनाएगी।
​दूसरों को सिखाएं: जो कुछ सीखें, उसे अपने साथियों और छोटे भाई-बहनों को भी सिखाएं, जैसा कि नबी ﷺ ने आदेश दिया है।

​ज़मीन की आबादी में हिस्सा लें: छोटे से छोटा आविष्कार या अच्छा विचार भी ज़मीन को बेहतर बना सकता है। अपनी टेक्नोलॉजी को लोगों की सेवा का माध्यम बनाएं।

​संतुलन बनाए रखें: नमाज़, पढ़ाई, खेलकूद, परिवार और आराम — सभी के लिए समय निकालें। नबी ﷺ के जीवन में हर काम के लिए समय था, लेकिन संतुलन के साथ।​अंतिम शब्द: हे मेरे युवाओं! भविष्य के निर्माता आप ही हैं

​मेरे प्यारे युवाओं, भाइयों और बहनों! आप सब कल के डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, शिक्षक और आविष्कारक हैं। सीरत-ए-रसूल ﷺ सिखाती है कि न तो ज्ञान से डरें और न ही ज्ञान पर घमंड करें। ज्ञान को विनम्रता के साथ और लोगों की सेवा के लिए प्राप्त करें।

​कुरान, हदीसें, इतिहास-ए-इस्लाम और आधुनिक विज्ञान — सब एक ही बिंदु पर केंद्रित हैं; यानी मुसलमान होने का अर्थ है ज्ञान प्रेमी, शोधकर्ता, रचनाकार और समाज के लिए उपयोगी इंसान बनना।​आज से यह तय कीजिए कि टेक्नोलॉजी को अपने ईमान और नैतिकता के अनुसार उपयोग करेंगे। याद रखें, इस मार्ग में आगे बढ़ने वाला हर कदम अल्लाह की इबादत है।

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