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दुश्मन आर्थिक दबाव के ज़रिए देश को नुकसान पहुंचाना चाहता है।हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सैयद सईद हुसैनी

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दुश्मन आर्थिक दबाव के ज़रिए देश को नुकसान पहुंचाना चाहता है।हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सैयद सईद हुसैनी

हुज्जतुल इस्लाम वल-मुस्लिमीन सैयद सईद हुसैनी ने इस सप्ताह बक़ीयतुल्लाह अल-आज़म मस्जिद में जुमआ की नमाज़ के खुतबे में कहा कि हालिया युद्ध में दुश्मन की हार के महत्वपूर्ण कारणों में वली-ए-फ़क़ीह के नेतृत्व में जनता का प्रतिरोध और एकता शामिल है। इस एकता और एकजुटता को बनाए रखना आवश्यक है।

उन्होंने 33 दिवसीय युद्ध के विभिन्न पहलुओं को याद करते हुए कहा कि हिज़्बुल्लाह लेबनान की जीत में क्रांतिकारी नेता के ऐतिहासिक संदेश की निर्णायक भूमिका थी। उनके अनुसार, यह संदेश शहीद क़ासिम सुलेमानी के माध्यम से सैयद हसन नसरल्लाह तक पहुंचा था, जिससे हिज़्बुल्लाह का मनोबल मजबूत हुआ और युद्ध की दिशा बदलने में मदद मिली।

कशान के इमाम-ए-जुमा ने कहां, ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि बहरैन, जिसका क्षेत्रफल लगभग अल्बोर्ज़ प्रांत के बराबर है, मोहम्मद रज़ा पहलवी के शासनकाल में ब्रिटिश साज़िशों के परिणामस्वरूप ईरान से अलग हुआ।

उन्होंने 28 मोर्दाद 1332 (19 अगस्त 1953) के तख्तापलट को भी अमेरिका की ईरान-विरोधी खुली दुश्मनी का एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया। उनके अनुसार, अमेरिका की दुश्मनी केवल अमेरिकी दूतावास पर कब्जे की घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें 1953 के तख्तापलट में हैं।

हुज्जतुल-इस्लाम हुसैनी ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति की हालिया उस टिप्पणी का उल्लेख किया जिसमें पेट्रोल की कीमत कम करना प्राथमिकता बताया गया था। उन्होंने कहा कि दुश्मन का मूल उद्देश्य शुरू से ही ईरान पर पूर्ण प्रभुत्व स्थापित करना, देश को विभाजित करना और शासन व्यवस्था को बदलना रहा है। उनके अनुसार, आज दुश्मन को अपने नारों से पीछे हटना पड़ रहा है, जो ईरानी जनता के प्रतिरोध और उल्लेखनीय एकता के सामने उसकी साज़िशों की विफलता को दर्शाता है।

उन्होंने दुश्मन की नई साज़िश का उल्लेख करते हुए कहा कि अमेरिका आर्थिक दबाव के जरिए देश में 18 दी की घटना जैसी असुरक्षा की स्थिति पैदा करने की उम्मीद कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस साज़िश का निश्चित जवाब वली-ए-फ़क़ीह के नेतृत्व में सभी धाराओं की एकता और जनता द्वारा ऊर्जा, पानी तथा आवश्यक वस्तुओं की गंभीरता से बचत है।

उन्होंने अमर बिल मारूफ और नही अनिल मुनकर की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि हिजाब और शालीनता के मामले में सभी संबंधित संस्थाओं को अपने कानूनी और धार्मिक दायित्वों को सही तरीके से निभाना चाहिए तथा इस महत्वपूर्ण विषय की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।

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