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कारगिल में जमीयत उलेमा-ए-इमामिया की ओर से भव्य तिरंगा यात्रा

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कारगिल में जमीयत उलेमा-ए-इमामिया की ओर से भव्य तिरंगा यात्रा

कारगिल में जमीयत उलेमा-ए-इमामिया कारगिल लद्दाख के तत्वावधान में स्वतंत्रता दिवस से पहले "तिरंगा यात्रा, भारत की स्थिरता रैली" का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। रैली का उद्देश्य राष्ट्रीय एकता, देशभक्ति, धार्मिक सद्भाव और देश की एकता व अखंडता के प्रति संकल्प व्यक्त करना था।

तिरंगा यात्रा की शुरुआत इमामिया चौक कारगिल से हुई। प्रतिभागी मुख्य बाज़ार, लाल चौक और सर्कुलर रोड से होते हुए फ़ातिमा चौक पहुँचे, जहाँ से वापस इमामिया चौक पर आकर रैली समाप्त हुई। रास्ते में विभिन्न स्थानों पर बड़ी संख्या में लोग रैली में शामिल होते गए।

प्रतिभागियों ने हाथों में राष्ट्रीय ध्वज उठा रखे थे और देशभक्ति के नारे लगाए। रैली का नेतृत्व जमीयत उलेमा-ए-इमामिया लद्दाख के अध्यक्ष शेख़ नज़ीर मेहदी मुहम्मदी ने किया, जबकि जमीयत के प्रशासनिक सदस्य और उलमा काउंसिल कारगिल के सदस्य भी उनके साथ थे।

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए हुज्जतुल इस्लाम शेख़ नज़ीर मेहदी मुहम्मदी ने कहा कि देश और राष्ट्रीय ध्वज उनके लिए अपनी जान से भी अधिक प्रिय हैं। उन्होंने कहा कि भारत की आज़ादी और तिरंगे की प्रतिष्ठा के लिए अनगिनत लोगों ने क़ुर्बानियाँ दी हैं और वर्तमान पीढ़ी की ज़िम्मेदारी है कि उन क़ुर्बानियों को याद रखे और उनका सम्मान करे।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस से पहले तिरंगा यात्रा का आयोजन देश और राष्ट्रीय ध्वज के प्रति प्रेम, सम्मान और वफ़ादारी व्यक्त करने के लिए किया गया है। कारगिल की जनता, सैनिकों और पूरे देश के नागरिकों द्वारा आज़ादी के लिए दी गई क़ुर्बानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्होंने कहा कि यह रैली देश के लिए अपनी जान क़ुर्बान करने वालों को श्रद्धांजलि है।

हुज्जतुल इस्लाम शेख़ नज़ीर मेहदी मुहम्मदी ने युवाओं और बुज़ुर्गों से ज़ोर देकर कहा कि वे राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करें और उसकी प्रतिष्ठा को सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर हर व्यक्ति को राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और गरिमा के लिए क़ुर्बानी देने के लिए तैयार रहना चाहिए।

उन्होंने भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को देश की बड़ी ताक़त बताते हुए कहा कि जनता को प्राप्त स्वतंत्रता और लोकतंत्र की रक्षा करना सभी की साझा ज़िम्मेदारी है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि तिरंगे की रक्षा वास्तव में देश की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि कारगिल के लोग देश से गहरा प्रेम करते हैं और उन्होंने इतिहास में देश के लिए महत्वपूर्ण क़ुर्बानियाँ दी हैं। उन्होंने जनता से अपील की कि राष्ट्रीय एकता, सद्भाव और भाईचारे को और अधिक मज़बूत बनाया जाए तथा राष्ट्रीय ध्वज का प्रतिनिधित्व करने वाले मूल्यों को बनाए रखा जाए।

उन्होंने अपने संबोधन के अंत में देशभक्ति की कविता "ऐ ख़ाके वतन, हम तुझे रुसवा न करेंगे" पढ़कर सुनाई।

तिरंगा यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से इमामिया चौक पर समाप्त हुई, जहाँ प्रतिभागियों ने देश, राष्ट्रीय ध्वज, एकता, लोकतंत्र और देशभक्ति की भावना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

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