Print this page

काशान के इमामे जुमआ: अल्लाह की याद दिलों को चमकाने वाली है

Rate this item
(0 votes)
काशान के इमामे जुमआ: अल्लाह की याद दिलों को चमकाने वाली है

हुज्जतुल इस्लाम वल-मुस्लिमीन सैयद सईद हुसैनी ने मस्जिद ए अमीर में काशान क्षेत्र के इमाम ए जुमआ की चौथी बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि इंसान के दिल की आध्यात्मिक स्थिति हमेशा एक जैसी नहीं रहती।

उन्होंने कहा कि कभी-कभी आध्यात्मिक सभाओं में शामिल होने और ईश्वरीय शिक्षाओं से लाभ उठाने के कारण इंसान की ऐसी स्थिति बन जाती है कि उसकी नज़र में दुनिया छोटी लगने लगती है और उसका दिल पवित्रता तथा आध्यात्मिकता की ओर आकर्षित हो जाता है। लेकिन जब वह दोबारा रोज़मर्रा की जिंदगी में लौटता है तो यह आध्यात्मिक स्थिति कमजोर हो सकती है।

उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक स्थिति में यह उतार-चढ़ाव निफ़ाक़ की निशानी नहीं है, क्योंकि इंसान भौतिक संसार और आध्यात्मिक संसार के बीच रहने वाला प्राणी है और उसकी प्रकृति में उतार-चढ़ाव मौजूद हैं।काशान में वली-ए-फ़क़ीह के प्रतिनिधि ने इस रिवायत का उल्लेख किया:

«اِنَّ القُلوبَ لَتَرینُ کَما یَرینُ السَّیفُ وَ جَلاؤُها ذِکرُالله»

उन्होंने कहा कि जिस तरह तलवार पर जंग लग जाती है और उसे चमकाने के लिए पॉलिश की आवश्यकता होती है, उसी तरह इंसान का दिल भी अल्लाह की याद, ज़िक्र और ईश्वरीय शिक्षाओं से संबंध का मोहताज है।

उन्होंने पैग़म्बर-ए-अकरम (स.ल.) के कुछ सहाबा की उस चिंता का उल्लेख किया जो रसूलुल्लाह (स.ल.) की सेवा से अलग होने के बाद अपनी आध्यात्मिक स्थिति में बदलाव को लेकर थी।

उन्होंने कहा कि पैग़म्बर (स.ल.) ने स्पष्ट किया कि यह निफ़ाक़ नहीं है। अगर इंसान हमेशा उसी आध्यात्मिक अवस्था में रहता तो वह फ़रिश्तों के साथ रहने जैसे उच्च दर्जों तक पहुंच जाता। लेकिन अल्लाह ने इंसान को इख़्तियार और वापस लौटने की क्षमता के साथ पैदा किया है।

हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन हुसैनी ने तौबा और इस्तिग़फ़ार के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा कि मोमिन वह नहीं है जो कभी गलती न करे, बल्कि सच्चा मोमिन वह है जो गलती के बाद अल्लाह की ओर लौटे और अपने रास्ते को सुधार ले।

उन्होंने इमाम बाक़िर (अ.स.) की उस शिक्षा का उल्लेख किया जिसमें मोमिन को «مُفَتَّنٌ تَوّابٌ» कहा गया है। उन्होंने कहा कि मोमिन हमेशा परीक्षा में रहता है, लेकिन उसकी महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि वह अल्लाह की ओर लौटता है और तौबा करता है।

काशान के इमाम ए जुमा ने अंत में कहा कि सबसे बेहतर रास्ता गुनाह से दूर रहना है, लेकिन जो बंदे सच्चे इख़लास के साथ तौबा करते हैं, उनके लिए अल्लाह की रहमत के दरवाज़े हमेशा खुले रहते हैं।

Read 5 times