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शहीद सैयद हसन नसरुल्लाह: ईमान, विलायत परस्ती और प्रतिरोध की विचारधारा का व्यावहारिक आदर्श

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शहीद सैयद हसन नसरुल्लाह: ईमान, विलायत परस्ती और प्रतिरोध की विचारधारा का व्यावहारिक आदर्श

क़ुम में शहीद सैयद हसन नसरुल्लाह की शख्सियत, विचार और मक्तब का जायज़ा» के शीर्षक से एक विशेष बैठक आयोजित की गई। इसमें वक्ताओं ने लेबनान के हिज़्बुल्लाह के शहीद प्रमुख की इल्मी, वैचारिक, नैतिक, आध्यात्मिक और जिहादी शख्सियत के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की और उन्हें आज की युवा पीढ़ी तथा हौज़ा-ए-इल्मिया के छात्रों के लिए एक प्रभावी व्यावहारिक आदर्श बताया।

यह विशेष बैठक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन «उमनाउर-रुसुल» की ओर से हौज़ा-ए-इल्मिया क़ुम की वैज्ञानिक समितियों के कार्यालय में आयोजित की गई। इसमें हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन अली मिस्बाह यज़्दी, हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन मुजतबा मिस्बाह यज़्दी तथा सम्मेलन के अन्य अधिकारियों ने भाग लिया।

हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन मुहम्मद तकी रब्बानी ने कहा कि शहीद सैयद हसन नसरुल्लाह के मक्तब और व्यक्तित्व पर वैज्ञानिक एवं शोधपरक कार्य के लिए लगभग 10 से 12 परियोजनाएँ विचाराधीन हैं। इनमें इस्लामी एकता और तक़रीब की अवधारणा, आध्यात्मिक एवं नैतिक आचरण, मीडिया के इस्तेमाल का तरीका, प्रभावी संचार, नेतृत्व की शैली और प्रतिरोध की साहित्यिक भाषा जैसे विषय शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि शहीद नसरुल्लाह के व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं से संबंधित प्रमाणिक सामग्री अभी सीमित है। इसलिए वैज्ञानिक और शोध के स्तर पर इस विषय में गंभीर एवं व्यापक कार्य करने की आवश्यकता है।

हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन रज़ा इस्कंदरी ने कहा कि आज विशेष रूप से युवाओं और हौज़ा-ए-इल्मिया के छात्रों को ऐसे सफल एवं व्यावहारिक आदर्शों की आवश्यकता है, जिनसे वे नेतृत्व, आध्यात्मिकता, संकट प्रबंधन और धार्मिक राजनीति के क्षेत्र में मार्गदर्शन प्राप्त कर सकें।

उन्होंने बताया कि अब तक शहीद सैयद हसन नसरुल्लाह के विषय पर 300 से अधिक शोध-पत्र सम्मेलन को प्राप्त हो चुके हैं। इन्हें विषयवार और व्यावहारिक वैज्ञानिक संग्रहों के रूप में संकलित करने का प्रयास किया जा रहा है।

हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन अली मिस्बाह यज़्दी ने शहीद सैयद हसन नसरुल्लाह को «ऐनी ईमान» का बेमिसाल उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि उनकी मूल विशेषता यह थी कि वे धार्मिक सत्यों पर केवल विश्वास ही नहीं रखते थे, बल्कि उन सत्यों को अपने व्यवहार, निर्णयों और दैनिक जीवन में व्यावहारिक रूप से प्रतिबिंबित करते थे।

उन्होंने कहा कि आयतुल्लाह मिस्बाह यज़्दी की दृष्टि में शहीद नसरुल्लाह की विलायत-परस्ती केवल बाहरी आज्ञापालन तक सीमित नहीं थी। वे रहबर-ए-मुअज़्ज़म इंक़लाब की मंशा और मार्गदर्शन को समझने तथा उस पर अमल करने का प्रयास करते थे। यहाँ तक कि जहाँ प्रत्यक्ष रूप से कोई निर्देश मौजूद न हो, वहाँ भी अपनी बसीरत और समझ के माध्यम से अपेक्षित मार्ग को पहचान लेते थे। इसी कारण आयतुल्लाह मिस्बाह उन्हें हज़रत वली-ए-अस्र (अ.ज.) के विशेष साथियों में सुमार करते थे।

हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन मुजतबा मिस्बाह यज़्दी ने भी आयतुल्लाह मिस्बाह यज़्दी और शहीद सैयद हसन नसरुल्लाह के गहरे वैचारिक एवं आध्यात्मिक संबंध का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह संबंध केवल व्यक्तिगत मित्रता नहीं था, बल्कि एक मक्तबी और वैचारिक रिश्ता था, जिसका केंद्र नैतिकता, विलायत-ए-फ़क़ीह और ईश्वरीय मरिफत के आधार पर मुजाहिदों का प्रशिक्षण था।

उन्होंने बताया कि शहीद नसरुल्लाह गहन अध्ययन के शौकीन थे। वे इमाम ख़ुमैनी (रह.), रहबर-ए-मुअज़्ज़म इंक़लाब, शहीद मुर्तज़ा मुतह्हरी और आयतुल्लाह मिस्बाह यज़्दी की वैचारिक एवं वैज्ञानिक पुस्तकों का लगातार अध्ययन करते थे और कुछ विषयों को अपने करीबी साथियों को भी पढ़ाते थे।

बैठक के अंत में डॉ. अब्दीपुर ने सुझाव दिया कि आयतुल्लाह मिस्बाह यज़्दी के शहीद नसरुल्लाह से संबंधित विचारों और दृष्टिकोण को एक संयुक्त शोध परियोजना के तहत संकलित करके प्रकाशित किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे प्रतिरोध के नेताओं और इस्लामी विचार की महत्वपूर्ण हस्तियों के बीच वैचारिक एवं आध्यात्मिक संबंधों के अध्ययन के क्षेत्र में एक विश्वसनीय वैज्ञानिक स्रोत तैयार किया जा सकता है।

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