ईरान के विदेश मंत्रालय के क़ानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उपमंत्री काज़िम ग़रीबाआबादी ने ब्रिटेन और फ्रांस के राजनयिकों की उस अपील का हवाला देते हुए कहा है, जिसमें उन्होंने अपनी सरकारों से इस्राईल को हथियार भेजना बंद करने, अवैध बस्तियों के साथ व्यापार पर रोक लगाने और हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालयों के फैसलों को लागू करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि, इस्राईल को हथियारों की आपूर्ति जारी रखना और किसी भी तरह का समर्थन देना, इस शासन द्वारा किए जा रहे अपराधों में जानबूझकर सहयोग और भागीदारी का चुनाव करना है।
विदेश नीति समूह के अनुसार, विदेश मंत्रालय के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उपमंत्री काज़िम ग़रीबआबादी ने शनिवार रात 22 अगस्त को एक संदेश में लिखा कि, ब्रिटेन और फ्रांस के 100 से अधिक वरिष्ठ राजनयिकों ने अपनी-अपनी सरकारों को चेतावनी दी है कि, इस्राईल की नीतियां ‘जातीय सफाए’ और ‘फ़िलिस्तीन को मिटाने’ की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
उन्होंने बताया कि, इन राजनयिकों ने लंदन और पेरिस से व्यावहारिक कदम उठाने की मांग की है। इनमें इस्राईल को हथियारों की आपूर्ति रोकना, अवैध बस्तियों के साथ व्यापार पर प्रतिबंध लगाना और हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालयों के फैसलों को लागू करना शामिल है।
इस मुद्दे पर वरिष्ठ ईरानी राजनयिक ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि, लंदन और पेरिस को इस स्थिति पर केवल ‘चिंता व्यक्त करने’ जैसे शब्दों के पीछे नहीं छिपना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि, इस्राईल को हथियारों की आपूर्ति जारी रखना और उसे किसी भी प्रकार का समर्थन देना, इस्राईली शासन द्वारा किए जा रहे अपराधों में सहयोग और भागीदारी करने का जानबूझकर लिया गया फैसला है।उन्होंने ब्रिटेन और फ्रांस से इस्राईल के समर्थन की नीति पर पुनर्विचार करने और व्यावहारिक कदम उठाने का आह्वान किया।