अंसारुल्लाह आंदोलन के नेता सैयद अब्दुल मलिक बद्रुद्दीन हौसी ने अरब जगत और इस्लामी देशों में ज़ायोनीवाद से जुड़ी हर तरह की निर्भरता से मुक्ति की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस्लामी पैगंबर हज़रत मुहम्मद (स.ल.) के जन्मदिवस के अवसर पर अपने भाषण में उन्होंने कहा कि मुस्लिम उम्मत को आज पहले से कहीं अधिक अपनी परिस्थितियों की समीक्षा करने और ईश्वरीय संदेश के साथ जागरूक संबंध मज़बूत करने की ज़रूरत है।
उन्होंने कहा कि हमें ज़ायोनीवाद के नेतृत्व वाली बुरी और भ्रष्ट ताकतों से सभी प्रकार की निर्भरता से मुक्ति के लिए प्रयास करना चाहिए। हमारे दौर में ज़ायोनी आंदोलन और पश्चिम में उसके समर्थक इन ताकतों के प्रमुख प्रतिनिधि हैं।
अल-हौसी ने कहा कि ज़ायोनीवाद मुस्लिम उम्मत को निशाना बना रहा है और लोगों पर प्रभुत्व, उपनिवेशवाद, अपमान, क्षेत्रों पर कब्जा तथा इस्लामी देशों की संपत्तियों की लूट चाहता है।
उन्होंने आगे कहा कि हालिया घटनाक्रम के दौरान हमने अमेरिका और इज़राइल की आक्रामक कार्रवाइयों के मुकाबले ईरान और एकजुट प्रतिरोध मोर्चे की जीत देखी है।
उन्होंने कहा कि लेबनान, गाजा, यमन और इराक सहित विभिन्न मोर्चों पर ये सफलताएं उस समय हासिल हुईं, जब दुश्मनों के पास बड़ी संख्या में साधन और भारी सैन्य शक्ति मौजूद थी।
अंसारुल्लाह नेता ने जोर देकर कहा कि प्रतिरोध मोर्चे ने जिहाद, दृढ़ता और जनता की इच्छाशक्ति पर भरोसा करने की रणनीति अपनाकर आक्रामक पक्ष की सैन्य और राजनीतिक गणनाओं को विफल किया और क्षेत्र की सुरक्षा तथा क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण सफलताएं हासिल कीं।
अपने भाषण में अल-हौसी ने सऊदी सरकार की आलोचना करते हुए यमन की जनता के खिलाफ उसके युद्ध और लगाए गए कथित अन्यायपूर्ण प्रतिबंधों पर भी सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि यमन की घेराबंदी जारी है, राष्ट्रीय संपत्तियों की लूट हो रही है और बीमारों तथा यात्रियों के लिए हवाई अड्डों की गतिविधियों को रोका जा रहा है, जबकि मक्का और मदीना के हवाई क्षेत्र ज़ायोनी लोगों के लिए खोल दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि तनाव बढ़ाने, सैन्य तैनाती और यमन को विभाजित करने की योजना बनाना भी आक्रामक कार्रवाई है और यह यमनी जनता के खिलाफ दबाव तथा दुश्मनी की नीति जारी रहने को दर्शाता है।
हौसी ने कहा कि इन अन्यायपूर्ण कार्रवाइयों के जवाब में यमन गणराज्य अपने सभी वैध साधनों का इस्तेमाल करते हुए और अपने कानूनी अधिकार के आधार पर “घेराबंदी के बदले घेराबंदी” की नीति लागू कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति के परिणामों की पूरी जिम्मेदारी आक्रामक पक्ष की होगी।
उन्होंने कहा कि मज़लूमों को आत्मरक्षा और जवाबी कार्रवाई की अनुमति देने वाली कुरआनी शिक्षाओं के आधार पर यमन की जनता से अपील है कि वे अल्लाह पर भरोसा करते हुए राष्ट्रीय एकता मजबूत करें और अपने वैध अधिकारों की पूर्ण प्राप्ति तक इस आक्रमण के खिलाफ संघर्ष जारी रखें।