Print this page

मुस्लिम महिला की वास्तविक स्थिति समाज में बेहतर ढंग से स्पष्ट की जाए

Rate this item
(0 votes)
मुस्लिम महिला की वास्तविक स्थिति समाज में बेहतर ढंग से स्पष्ट की जाए

लुरिस्तान प्रांत के सिपाह हज़रत अबुलफ़ज़्ल (अ.स.) की महिला बसीज संगठन की प्रमुख सैयदा रैहाना रहीमज़ादे ने आज मुस्लिम महिला की इस्लामी पहचान पर आयोजित एक बैठक में मुस्लिम महिला के स्थान और भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने परिवार और समाज में महिलाओं की सही भूमिका को समझने तथा इस्लामी महिला पहचान के विभिन्न पहलुओं को स्पष्ट करने के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने मुस्लिम महिला के तीसरे मॉडल का उल्लेख करते हुए कहा कि मुस्लिम महिला अपनी पहचान, गरिमा और इस्लामी मूल्यों को बनाए रखते हुए सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक क्षेत्रों में सक्रिय, प्रभावी और जिम्मेदार भूमिका निभा सकती है।

लुरिस्तान की महिला बसीज संगठन की प्रमुख ने महिलाओं की क्षमताओं और प्रतिभाओं पर ध्यान देने को आवश्यक बताते हुए कहा कि उम्मीद है कि महिलाएं मुस्लिम महिला के तीसरे मॉडल के अनुसार हज़रत फ़ातिमा ज़हेरा (स.ल.) के व्यक्तित्व और जीवनशैली से प्रेरणा लेकर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में प्रभावी भूमिका निभाएंगी।

रहीमज़ादे ने कहा कि इस्लाम की शिक्षाओं में महिला को एक उच्च और सम्मानित स्थान प्राप्त है। इसलिए मुस्लिम महिला की वास्तविक स्थिति और उसके सम्मान को समाज में बेहतरीन तरीके से स्पष्ट किया जाना चाहिए तथा परिवार और समाज की उन्नति के लिए महिलाओं की क्षमताओं का उपयोग किया जाना चाहिए।

उन्होंने पवित्रता और हिजाब के महत्व की ओर भी संकेत करते हुए इसे इस्लामी पहचान का एक महत्वपूर्ण घटक और समाज के नैतिक एवं सांस्कृतिक स्वास्थ्य का आधार बताया। उन्होंने कहा कि लज्जा और पवित्रता ईमान की आवश्यक शर्तों में से हैं और मुस्लिम महिला की सुरक्षा तथा गरिमा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

महिला बसीज संगठन की प्रमुख ने परिवार में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि महिला परिवार की बुनियाद और आने वाली पीढ़ी के पालन-पोषण के महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक है। इसलिए महिलाओं की स्थिति मजबूत करने और उनकी जागरूकता बढ़ाने पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए।

बैठक में परिवार की नींव मज़बूत करने में महिला की भूमिका आने वाली पीढ़ी का पालन-पोषण, सांस्कृतिक और सामाजिक समस्याओं का मुकाबला तथा महिलाओं में जागरूकता और अंतर्दृष्टि बढ़ाने की आवश्यकता जैसे विषयों पर भी चर्चा और विचार-विमर्श किया गया।

Read 2 times