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हज़रत रसूल ए अकरम स.ल.व.की पैरवी के लिए सब्र और दृढ़ता जरूरी है।हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन हिदायत

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हज़रत रसूल ए अकरम स.ल.व.की पैरवी के लिए सब्र और दृढ़ता जरूरी है।हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन हिदायत

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मुहम्मद हादी हिदायत ने हरम-ए हज़रत मासूमा सलामुल्लाह अलैहा में आयोजित तफ़्सीर-ए-क़ुरआन की एक बैठक को संबोधित करते हुए रसूले अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि वसल्लम और इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम की विलादत-ए-बासआदत पर मुबारकबाद पेश की और सूरह-ए-फ़त्ह की आख़िरी आयत में बयान किए गए रसूल स.ल.व. के अनुयायियों की विशेषताओं को स्पष्ट किया।

उन्होंने आयत «مُحَمَّدٌ رَسُولُ اللَّهِ وَالَّذِینَ مَعَهُ أَشِدَّاءُ عَلَی الْکُفَّارِ رُحَمَاءُ بَیْنَهُمْ» की ओर इशारा करते हुए कहा कि रसूले अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि वसल्लम के सच्चे अनुयायी बातिल और ताग़ूत के मुक़ाबले में मज़बूत और दृढ़ रहते हैं, जबकि ईमान वालों के साथ प्रेम, रहमत और हमदर्दी का व्यवहार करते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि «وَالَّذِینَ مَعَهُ» से तात्पर्य रसूले अकरम स.ल.व. के साथ सच्ची संगति और पैरवी है, जो आसान काम नहीं बल्कि सब्र और दृढ़ता का तकाज़ा करती है। हज़रत नूह अलैहिस्सलाम और हज़रत ख़िज़्र अलैहिस्सलाम के वाक़ियात भी इस हक़ीक़त को स्पष्ट करते हैं।

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन हिदायत ने कहा कि मोमिन को ताग़ूत और बातिल के सामने कभी नहीं झुकना चाहिए तथा ईमान वालों को आपसी एकता, प्रेम और भाईचारे के साथ राह-ए-हक़ पर दृढ़ रहना चाहिए।

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