सैन्य मामलों के विश्लेषक रॉबर्ट फॉक्स ने कहा है कि ईरान की रणनीतिक ताकत और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल करने की क्षमता ने क्षेत्र में अमेरिकी सेना की कमजोरियों को उजागर किया है।
फॉक्स ने ब्रिटिश अख़बार में प्रकाशित एक लेख में कहा कि जिस युद्ध के केवल छह सप्ताह चलने की उम्मीद थी, वह सातवें महीने में प्रवेश कर चुका है, लेकिन अभी तक कोई भरोसेमंद समाधान सामने नहीं आया है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव फिर बढ़ने के साथ ही तेल की कीमतों में तुरंत 2 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
उन्होंने कहा कि ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण के महत्व को समझ लिया है और इसका इस्तेमाल अमेरिका तथा उसके सहयोगियों पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव बनाने के लिए कर रहा है।
फॉक्स के मुताबिक, ईरान फारस की खाड़ी से लेकर ब्रिटेन, डेनमार्क और कनाडा तक अपने सहयोगियों के प्रति ट्रंप के व्यवहार का लाभ उठा सकता है। वहीं, अमेरिका के राजनीतिक और सैन्य संसाधनों पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
उन्होंने बताया कि अमेरिका ने 50 हजार अतिरिक्त सैनिकों और दो विमानवाहक पोत समूहों की तैनाती के बाद बढ़ते सैन्य खर्च का सामना किया है। इसके अलावा बड़ी मात्रा में मिसाइलों और युद्ध सामग्री का इस्तेमाल किया गया है।
लिंकन विमानवाहक पोत 205 से अधिक दिनों तक समुद्र में तैनात रहा है और उसके सैनिकों ने अवसाद, चिंता तथा आत्महत्या जैसी गंभीर समस्याओं का उल्लेख किया है।
फॉक्स ने कहा कि यह दबाव केवल मध्य-पूर्व में अमेरिकी सैन्य तैयारियों को प्रभावित नहीं कर रहा, बल्कि वैश्विक संकटों से निपटने की अमेरिकी सेना की क्षमता को भी कमजोर कर रहा है।