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अमेरिका मानवाधिकार का झूठा दावेदार; मीनाब के बाद शादी समारोह पर हमला

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अमेरिका मानवाधिकार का झूठा दावेदार; मीनाब के बाद शादी समारोह पर हमला

सीरीक शहर में एक शादी समारोह को निशाना बनाए जाने की दुखद घटना में कई आम नागरिक शहीद और घायल हुए। इस घटना ने एक बार फिर मानवाधिकारों का दावा करने वालों का असली चेहरा दुनिया के सामने ला दिया। मकरान के तटीय क्षेत्र में हुई इस घटना ने दो परिवारों के वैवाहिक रिश्ते की खुशी को गहरे मातम में बदल दिया और क्षेत्र के लोगों के दिलों पर गहरा घाव छोड़ दिया।

जब सीरीक के परिवार अपनी पुरानी परंपराओं के अनुसार शादी की खुशियां मनाने के लिए एकत्र हुए थे, उसी समय यह हमला तमाम मानवीय और नैतिक सिद्धांतों का उल्लंघन करते हुए निहत्थे नागरिकों की सुरक्षा के प्रति गहरी दुश्मनी और आक्रामक मानसिकता का प्रतीक बन गया।

इस हमले में कोई सैन्य केंद्र या सैन्य ठिकाना निशाना नहीं था, बल्कि एक परिवार का शांतिपूर्ण माहौल और सामाजिक जीवन की पवित्रता निशाने पर थी। जिस समारोह में खुशी, संगीत और जश्न की आवाज़ें गूंजनी थीं, वह मिसाइल हमले के कारण खून से नहा गया।

इस भयावह अपराध पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय और तथाकथित मानवाधिकार संगठनों की खामोशी एक बार फिर साम्राज्यवादी ताक़तों के दोहरे मापदंड को उजागर करती है।

यह घटना केवल एक स्थानीय त्रासदी नहीं, बल्कि उन निर्दोष लोगों के खिलाफ व्यवस्थित अन्याय का प्रतीक है, जो प्रतिरोध के क्षेत्र में जीवन बिता रहे हैं और बाहरी हस्तक्षेप के मुकाबले अपनी स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा के लिए भारी कीमत चुका रहा हैं।

उन बच्चों की कल्पना ही इस त्रासदी की गहराई को समझने के लिए काफी है, जो उस रात संगीत और मासूम हंसी के बजाय धमाकों की भयावह आवाज़, धूल-गुबार और अपनी माताओं की चीख-पुकार सुनने पर मजबूर हुए।

इस तरह के अपराध लोगों के संकल्प को कमजोर नहीं कर सकते, बल्कि इसके विपरीत उन्हें साम्राज्यवादी मोर्चे की कड़वी सच्चाई से और अधिक अवगत कराते हैं तथा दुश्मन की साजिशों के मुकाबले एकता और जागरूकता की आवश्यकता को और उजागर करते हैं।

मीडिया, धार्मिक और सांस्कृतिक संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि वे इस अपराध के विभिन्न पहलुओं को वैश्विक जनमत के सामने स्पष्ट करें, ताकि सीरीक के पीड़ित परिवारों की आवाज़ दुश्मन के मीडिया शोर में कभी दब न जाए।

इस त्रासदी में शहीद होने वालों की याद को जीवित रखना उन लोगों के लिए कम से कम श्रद्धांजलि है, जिनकी ज़िंदगियां साम्राज्यवादी मोर्चे की विस्तारवादी और नाजायज़ इच्छाओं की भेंट चढ़ गईं।

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