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संयुक्त राष्ट्र؛निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना युद्ध अपराध है ईरानी राजदूत

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संयुक्त राष्ट्र؛निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना युद्ध अपराध है ईरानी राजदूत

ईरान के राजदूत और संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि के उप प्रमुख ग़ुलामहुसैन दरज़ी ने सुरक्षा परिषद और संयुक्त राष्ट्र महासचिव को भेजे पत्र में कहा कि निर्दोष नागरिकों और नागरिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है।

उन्होंने कहा कि 1 सितंबर 2026 को अमेरिका ने ईरान के दक्षिणी क्षेत्रों के कई शहरों पर हमले किए, जिनमें नागरिकों और गैर-सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया।

उन्होंने बताया कि होर्मोज़गान प्रांत के सीरीक शहर के कोहस्तक इलाके में एक रिहायशी मकान को उस समय निशाना बनाया गया, जब वहां शादी समारोह चल रहा था। उनके अनुसार, इस हमले में चार नागरिक, जिनमें एक चार वर्षीय बच्चा भी शामिल था, शहीद हुए, जबकि 70 से अधिक लोग घायल हुए।

ईरानी राजदूत ने कहा कि इस्लामी गणराज्य ईरान इस घटना की कड़ी निंदा करता है। नागरिकों, विशेषकर बच्चों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के मूलभूत प्रावधानों का गंभीर उल्लंघन और युद्ध अपराध है।

उन्होंने सुरक्षा परिषद से मांग की कि वह इन हमलों का संज्ञान ले और इसके जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करे।

दरज़ी ने अपने पत्र में आगे कहा कि ईरान ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए अमेरिकी सैन्य ठिकानों के खिलाफ रक्षात्मक और अनुपातिक कार्रवाई की है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका की कार्रवाई केवल इस घटना तक सीमित नहीं है। 28 फरवरी 2026 से जारी हमलों के दौरान नागरिक इलाकों, स्कूलों, अस्पतालों, हवाई अड्डों, रिहायशी क्षेत्रों, पुलों, सड़कों और रेलवे प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाया गया है।

ईरानी राजदूत ने कहा कि कोहस्तक पर हमला अमेरिका और इज़राइल द्वारा पूरे ईरान में किए जा रहे हमलों की एक व्यापक श्रृंखला का हिस्सा है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।

उन्होंने अपने पत्र में अमेरिकी अधिकारियों के कुछ बयानों का हवाला देते हुए कहा कि नागरिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की धमकियां अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हैं और क्षेत्र में तनाव बढ़ाने का कारण बन रही हैं।

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