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जनरल अब्दुल्लाही: ईरान ने दुनिया के सामने प्रतिरोध का नया मॉडल पेश किया

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जनरल अब्दुल्लाही: ईरान ने दुनिया के सामने प्रतिरोध का नया मॉडल पेश किया

ईरान के सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ के प्रमुख और केंद्रीय मुख्यालय हज़रत ख़ातमुल-अंबिया (अ.) के कमांडर मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने ‘सॉफ्ट वॉर’ के क्षेत्र में जिम्मेदार अधिकारियों की विशेष बैठक को संबोधित किया। उन्होंने देश के खिलाफ प्रभुत्ववादी व्यवस्था की व्यापक और जटिल साजिशों के विभिन्न पहलुओं का उल्लेख करते हुए कहा,युद्ध की सही व्याख्या करना और कठोर युद्ध से आगे निकलना एक महान कला है।

आज दुश्मन ईरानी राष्ट्र और देश के खिलाफ पूरी तरह से मिश्रित, सॉफ्ट और संज्ञानात्मक युद्ध में उलझा हुआ है।

उन्होंने दुश्मनों की साम्राज्यवादी सोच और उनकी गलत गणनाओं को स्पष्ट करते हुए कहा,जो राष्ट्र अल्लाह पर भरोसा करता है, वह हमेशा मैदान में विजयी रहता है। अमेरिकियों ने 80 वर्षों से अधिक समय से किसी देश से ‘नहीं’ सुनने की आदत नहीं रखी है।

ईरान पर आक्रमण से पहले उनकी गलत उम्मीद और धारणा यह थी कि यह महान राष्ट्र आत्मसमर्पण कर देगा, लेकिन यह एक ऐसी खोखली कल्पना थी जो कभी पूरी नहीं होगी।

सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ के प्रमुख ने कहा कि अमेरिकी और ज़ायोनी दुश्मन ईरान और प्रतिरोध मोर्चे के साथ युद्ध में अपनी क्षेत्रीय और सैन्य विफलताओं की भरपाई करने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा,ज़ायोनी और अमेरिकी दुश्मन सॉफ्ट वॉर, संज्ञानात्मक युद्ध और आर्थिक दबाव के जरिए अपनी रणनीतिक कमियों और पराजयों की भरपाई करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अल्लाह की कृपा, जनता के साहस और देश के अधिकारियों की सूझबूझ से वे इस क्षेत्र में भी निश्चित रूप से कुछ हासिल नहीं कर पाएंगे और ईरान के खिलाफ सैन्य युद्ध में अपनी शर्मनाक हार के इतिहास में एक और हार जोड़ेंगे।

उन्होंने राष्ट्रीय एकजुटता और इस महत्वपूर्ण संघर्ष में सभी उपलब्ध संसाधनों के इस्तेमाल की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा,सॉफ्ट और संज्ञानात्मक युद्ध का सामना करने के लिए दुश्मन के खिलाफ सभी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय क्षमताओं का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इन कठिन परिस्थितियों में सॉफ्ट और संज्ञानात्मक युद्ध के प्रत्येक कमांडर और अधिकारी पर भारी जिम्मेदारी है, जिसे उन्हें निभाना होगा।

मेजर जनरल अब्दुल्लाही ने मीडिया और सही तरीके से घटनाओं की व्याख्या करने के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इस संघर्ष का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ‘कथानकों का युद्ध’ है, जिस पर उद्देश्यपूर्ण और बुद्धिमत्तापूर्ण तरीके से काम किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ईरान के सशस्त्र बलों ने खतरों का मुकाबला करते हुए अमेरिकी और ज़ायोनी आक्रामक दुश्मन का असममित तरीके से सामना किया है और पहल अपने हाथ में रखी है।

मेजर जनरल अब्दुल्लाही ने क्षेत्र और दुनिया में इस्लामी क्रांति द्वारा प्रस्तुत मॉडल का उल्लेख करते हुए कहा,इस्लामी गणराज्य ईरान ने अपने ईश्वरीय और राष्ट्रीय मूल्यों में दृढ़ विश्वास के कारण दुनिया के सामने प्रतिरोध का एक नया मॉडल पेश किया है।

अल्लाह की कृपा से भविष्य की दुनिया अतीत की दुनिया से अलग होगी। यह बदलाव ईरानी राष्ट्र के हित में होगा और इसके साथ अमेरिका की शक्ति का निश्चित पतन भी होगा।

बैठक के अंतिम भाग में सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ के प्रमुख और केंद्रीय मुख्यालय हज़रत ख़ातमुल-अंबिया (अ.) के कमांडर ने मीडिया मोर्चे और सॉफ्ट वॉर के जिम्मेदार लोगों के शांत, बुद्धिमत्तापूर्ण और निरंतर प्रयासों की सराहना की। उन्होंने वास्तविकताओं को स्पष्ट करने तथा दुश्मन के मिश्रित और संज्ञानात्मक हमलों का मुकाबला करने में उनके अथक प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया।

उन्होंने जोर देकर कहा कि ये प्रयास देश की राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के स्तर का एक पवित्र जिहाद हैं। उन्होंने इस क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों से अपील की कि वे अंतर्दृष्टि तथा हथियार, ईमान, अभिव्यक्ति और कलम की शक्ति पर भरोसा करते हुए इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा और समाज में उम्मीद को बढ़ाने के लिए पहले से अधिक दृढ़ता और शक्ति के साथ आगे बढ़ें।

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