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कोलकाता में ‘अल्पसंख्यक बुद्धिजीवी सम्मेलन’ का आयोजन

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कोलकाता में ‘अल्पसंख्यक बुद्धिजीवी सम्मेलन’ का आयोजन

पश्चिम बंगाल की अल्पसंख्यक समुदायों के संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण तथा उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति की समीक्षा के लिए कोलकाता की आलिया यूनिवर्सिटी के पार्क सर्कस कैंपस में एक दिवसीय ‘अल्पसंख्यक बुद्धिजीवी सम्मेलन’ का आयोजन किया गया।

‘यूनाइटेड फोरम ऑफ ऑल टाइप्स ऑफ माइनॉरिटी ऑर्गनाइजेशन्स’ के तत्वावधान में 20 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक आलिया यूनिवर्सिटी के पार्क सर्कस कैंपस स्थित सेमिनार हॉल में यह सम्मेलन आयोजित हुआ।

सम्मेलन का उद्देश्य वर्तमान परिस्थितियों में अल्पसंख्यक समुदायों को पेश आने वाली विभिन्न समस्याओं और अनिश्चितताओं पर विचार करते हुए रचनात्मक मार्गदर्शन प्रदान करना तथा भविष्य के लिए प्रभावी कार्ययोजना और नीतियां तैयार करना था। इसमें पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से आए अल्पसंख्यक समुदायों के बुद्धिजीवियों, नेताओं, कानूनी विशेषज्ञों और युवा पीढ़ी, विशेष रूप से ‘जेन-ज़ी’ (Gen-Z) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कोलकाता में ‘अल्पसंख्यक बुद्धिजीवी सम्मेलन’ का आयोजन, संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर चर्चा

आयोजकों के अनुसार, सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य धर्म, जाति, राजनीतिक दल और वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठकर समानता, सहिष्णुता, आपसी सद्भाव और स्वस्थ सामाजिक वातावरण को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त प्रयासों को आगे बढ़ाना था।

कोलकाता में ‘अल्पसंख्यक बुद्धिजीवी सम्मेलन’ का आयोजन, संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर चर्चा

विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा

सम्मेलन में मुस्लिम, बौद्ध, जैन, ईसाई, सिख और हिंदू दलित समुदायों के प्रमुख प्रतिनिधियों और बुद्धिजीवियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने अपने-अपने समुदायों का प्रतिनिधित्व करते हुए मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे।

सम्मेलन के संयोजकों में मौलाना अनवार हुसैन क़ासमी, मुस्लिम प्रतिनिधि एवं बीएसपी संरक्षक; बिशप डॉ. ऑगस्टिन सुकुमार सरकार, ईसाई प्रतिनिधि; श्री तरसीम सिंह, सिख प्रतिनिधि; तथा धर्म आनंद भिक्षु, नंपट बौद्ध विहार शामिल थे।

सम्मेलन में राज्य के प्रमुख कानूनविदों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित अनेक लोगों ने भाग लिया। इनमें सेवानिवृत्त न्यायाधीश अंताज अली शाह, आईएसएफ विधायक पीरज़ादा नौशाद सिद्दीकी, ‘क़लम’ के संपादक ए.एच. इमरान, मौलाना कमरुज़्ज़मां, एम.वाई.एफ. व एम.सी.; ताईदुल इस्लाम, एसडीपीआई; नूरुल इस्लाम, प्रधानाध्यापक; मौलाना अब्दुल मतीन, टीएमसी विधायक; प्रोफेसर नुशीन खान, सुरेंद्रनाथ कॉलेज; प्रोफेसर सैफुल्लाह, आलिया यूनिवर्सिटी; शमीम अहमद, हाई कोर्ट के वकील; साबिर अहमद, प्रातिची ट्रस्ट के सांख्यिकीविद्; डॉ. फवाद हलीम, सीपीएम; डॉ. नूरुल इस्लाम, आलिया यूनिवर्सिटी के पूर्व रजिस्ट्रार; पासरुल आलम, वकील एवं यूजीसी के संपादक; मुहम्मद नूरुद्दीन, जमाअत के पूर्व अमीर-ए-हल्का; प्रोफेसर सईदुर्रहमान, आलिया यूनिवर्सिटी; अबुल क़ासिम मुंशी, हाई कोर्ट के पूर्व सरकारी लोक अभियोजक; सरवर हसन, डब्ल्यूपीआई; मौलाना रूहुल अमीन, एकतान; उमर वाइज़, सामाजिक कार्यकर्ता; मुहम्मद शाह आलम, अमानत व कुरआन स्टडी सर्कल; माफ़िलुल इस्लाम, स्तंभकार; प्रोफेसर अहसन मलिक, आलिया यूनिवर्सिटी; इबादुल इस्लाम, प्रधानाध्यापक एवं पत्रकार; खलील मलिक, सामाजिक कार्यकर्ता; हुज्जतुल-इस्लाम मौलाना डॉ. रिज़वानुल इस्लाम, जामिया अल-मुस्तफा अल-आलमिया के पूर्व व्याख्याता एवं शिया प्रतिनिधि; अशफाक अली, वकील एवं कांग्रेस प्रवक्ता; शम्सुल आलम, पूर्व प्राचार्य; अनीसुर्रहमान, वकील; डॉ. मंज़ूरुल हक़, कोलकाता; इम्तियाज़ मुल्ला, सामाजिक कार्यकर्ता; अमीनुल इस्लाम, पूर्व डीआई एवं एडीएमई; मौलाना मुफ़ज़्ज़ल मलिक, पूर्व अधीक्षक एवं ‘शिक्षा रत्न’ पुरस्कार प्राप्तकर्ता; अबुल हुसैन, आईयूएमएल; प्रोफेसर रबीउल इस्लाम, सेंट ज़ेवियर्स कॉलेज; हक़ीक़ुल इस्लाम, एसडीपीआई; गुलाम मोइनुद्दीन, अधीक्षक, हाथीशाला; नज़रुल हक़ सिपाही, पूर्व डीआई एवं डीएमई, बीएसपी; प्रोफेसर अल्फ्रेड, आलिया यूनिवर्सिटी एवं बंगाल माइनॉरिटी काउंसिल; प्रोफेसर सालेहा बेगम, डी.एच. महिला कॉलेज; नज़रुल इस्लाम, सामाजिक कार्यकर्ता; महीम अहमद, सामाजिक कार्यकर्ता; आसिफ़ रज़ा अंसारी, हाई कोर्ट के वकील; हुसैन ग़ाज़ी, सामाजिक कार्यकर्ता; हादीउज़्ज़मां, लेखक; मुहम्मद कलीमुल्लाह, जे.यू.पी.; साजिदुर्रहमान, एम.एस.यू.; तथा रेवरेन्ड श्यामल घड़ुई, बीएसपी आदि शामिल थे।

कोलकाता में ‘अल्पसंख्यक बुद्धिजीवी सम्मेलन’ का आयोजन, संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर चर्चा

महत्वपूर्ण मुद्दों और सुझावों पर चर्चा

बैठक में अल्पसंख्यक समुदायों के बीच संपर्क और आपसी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कई सुझावों और भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा की गई।

जमीनी स्तर पर एकता स्थापित करने का सुझाव:
जिला और ब्लॉक स्तर पर प्रतिनिधियों और सदस्यों को सक्रिय करके विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों को एक मंच पर लाने तथा जन-जागरूकता पैदा करने का सुझाव दिया गया।

अन्याय और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने पर जोर:
प्रतिभागियों ने जोर दिया कि अल्पसंख्यक समुदाय आपसी मतभेदों को कम करते हुए एकजुट होकर किसी भी प्रकार के अन्याय, अत्याचार और दमन के खिलाफ आवाज उठाएं तथा अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी और लोकतांत्रिक तरीकों से प्रयास करें।

सोशल मीडिया के प्रभावी इस्तेमाल का सुझाव:
वर्तमान दौर में सोशल मीडिया को संचार और जनसंपर्क का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए इसके सकारात्मक और प्रभावी इस्तेमाल के जरिए सही जानकारी, गतिविधियों और संदेशों को लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।

डॉ. मौलाना रिज़वानुस्सलाम खान का संबोधन

डॉ. मौलाना रिज़वानुस्सलाम ने अपने संबोधन में विशेष रूप से मुस्लिम समाज में आंतरिक मतभेदों को कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने मुसलमानों के बीच अनावश्यक फतवेबाजी और एक-दूसरे को काफ़िर घोषित करने की प्रवृत्ति को समाप्त करने की आवश्यकता बताते हुए आपसी भाईचारे, सहिष्णुता और एकता को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि समय की कमी के कारण यदि सम्मेलन में शामिल वक्ता अपने विचार पूरी तरह प्रस्तुत नहीं कर सके हैं, तो वे अपने विस्तृत लेख लिखित रूप में जमा करें, ताकि उनके सुझावों को भविष्य की कार्ययोजना में शामिल किया जा सके।

भविष्य की कार्ययोजना पर विचार

सम्मेलन में यह सुझाव भी सामने आया कि विभिन्न धर्मों से जुड़े अल्पसंख्यक नेता पहले अपनी-अपनी समुदायों के लोगों से मुलाकात कर उन्हें आपसी एकता और मिलकर काम करने की आवश्यकता से अवगत कराएं। इसके बाद विभिन्न धर्मों के नेता संयुक्त रूप से एक मजबूत मंच का गठन करें।

इसके अलावा, कानूनी संघर्ष और संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण के लिए प्रमुख कानूनी विशेषज्ञों और वकीलों की एक अलग कानूनी समिति गठित करने का सुझाव दिया गया। इसके बाद विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों के नेता आपसी एकता के आधार पर तय किए गए कार्यक्रमों और सुझावों को व्यावहारिक रूप देने के लिए कदम उठाएंगे।

कोलकाता में ‘अल्पसंख्यक बुद्धिजीवी सम्मेलन’ का आयोजन, संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर चर्चा

समापन

सम्मेलन के अंत में प्रतिभागियों और बुद्धिजीवियों ने उम्मीद जताई कि विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों की ओर से संयुक्त रूप से शुरू किया गया यह प्रयास भविष्य में राज्य में एक प्रभावी सामाजिक मंच के गठन और आपसी सहयोग को बढ़ावा देने का माध्यम बन सकता है।

कार्यक्रम के आयोजन और संचालन में पश्चिम बंगाल की अल्पसंख्यक समुदायों की ओर से कार्यवाहक सचिव मौलाना अब्दुल रऊफ, प्रोफेसर जहान अली, श्यामल घड़ुई और मारिया घड़ुई ने जिम्मेदारियां निभाईं।

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