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आयतुल्लाहिल उज़्मा शुबैरी ज़ंजानी फिक़्ह और उसूल में बेमिसाल विद्वान थे

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सैयद मुहम्मद बाक़िर गुलपायगानी ने अपने शोक संदेश में कहा कि आयतुल्लाहिल उज़्मा शुबैरी ज़ंजानी फिक़्ह और उसूल में बेमिसाल गहरी समझ रखने वाले महान विद्वान और हौज़ा ए इल्मिया के प्रमुख स्तंभों में से थे।

,सैयद मुहम्मद बाक़िर गुलपायगानी ने अपने शोक संदेश में कहा कि आयतुल्लाहिल उज़्मा शुबैरी ज़ंजानी फिक़्ह और उसूल में बेमिसाल गहरी समझ रखने वाले महान विद्वान और हौज़ा ए इल्मिया के प्रमुख स्तंभों में से थे।

بسم الله الرحمن الرحیم

إِذَا مَاتَ الْعَالِمُ ثُلِمَ فِی الْإِسْلَامِ ثُلْمَةٌ لَا یَسُدُّهَا شَیْءٌ إِلَی یَوْمِ الْقِیَامَةِ

मरज ए तक़लीद, हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा हाजी सैयद मूसा शुबैरी ज़ंजानी रिज़वानुल्लाहि तआला अलैह के निधन से हमें अत्यंत दुख और गहरा सदमा पहुंचा है।

वह महान और नेक व्यक्तित्व वर्षों तक इल्मी मेहनत करने और क़ुम के पवित्र हौज़ा-ए-इल्मिया में बड़ी संख्या में छात्रों की तरबियत करने के बाद फ़िक़्ह के प्रमुख विद्वानों और हौज़ा-ए-इल्मिया के इल्मी स्तंभों में शामिल हुए। फ़िक़्ह और उसूल के विषयों में उनकी बेमिसाल गहरी सूझ-बूझ, स्रोतों का व्यापक अध्ययन और इल्म-ए-रिजाल के सिद्धांतों पर विशेष ध्यान ने उन्हें एक विशिष्ट इल्मी स्थान प्रदान किया था।

तदरीस और योग्य छात्रों की तरबियत के क्षेत्र में उनकी निरंतर मौजूदगी तथा शिया इल्मी विरासत की तहक़ीक़ और उसे स्पष्ट करने की उनकी कोशिश हौज़ा-ए-इल्मिया के लिए एक अनमोल पूंजी है। इसके प्रभाव और बरकतें उनके शागिर्दों के माध्यम से जारी रहेंगी।

इस अपूरणीय क्षति पर हम हज़रत वली-ए-अस्र (अ.ज.), मराजे-ए-तक़लीद, हौज़ा-ए-इल्मिया, उनके शागिर्दों और चाहने वालों, विशेष रूप से उनके सम्मानित परिवार, उनके प्रिय भाई और उनके सम्मानित बेटों की सेवा में संवेदना और ताज़ियत पेश करते हैं।

हम अल्लाह तआला से दुआ करते हैं कि वह इस महान फ़क़ीह के दर्जात को बुलंद करे, उन्हें अहलेबैत (अ.स.) के साथ महशूर करे और उनके परिजनों को सब्र और सुकून अता फरमाए।

बैत हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा गुलपायगानी र.ह.
सैयद जवाद और सैयद मुहम्मद बाक़िर गुलपायगानी

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