ईरान के बुशहर प्रांत के महिला धार्मिक शिक्षण संस्थानों के प्रमुख ने कर्बला के आंदोलन को स्पष्ट करने में हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा की रणनीतिक भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि उनका सब्र और दूरदर्शिता वैज्ञानिक गतिविधियों तथा जिहाद-ए-तबयीन के लिए प्रमुख आदर्श हैं।
हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अली अकबर इस्माईली, जो बुशहर प्रांत के महिला धार्मिक शिक्षण संस्थानों के प्रमुख हैं, ने बोराज़जान स्थित मदरसा-ए-इल्मिया हज़रत रुकय्या (स.ल.) में नए दाखिला लेने वाली छात्राओं के लिए आयोजित «अरबईन-ए-तआली» समारोह में हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा के व्यक्तित्व के वैचारिक पहलुओं और इस्लामी इतिहास में उनकी रणनीतिक भूमिका का विश्लेषण किया।
हुज्जतुल इस्लाम इस्माईली ने हज़रत ज़ैनब (स.ल.) के महान व्यक्तित्व और कर्बला के आंदोलन में उनकी भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व केवल घटनाओं को देखने वाली एक महिला तक सीमित नहीं था, बल्कि वे वास्तव में इमाम हुसैन (अ.ल.) के आंदोलन की ध्वजवाहक और उसकी व्याख्याकार थीं।
उन्होंने इस आंदोलन की महत्ता के संबंध में सर्वोच्च नेता की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए हज़रत ज़ैनब (स.ल.) को सत्य के मार्ग पर चलने वालों के लिए एक अद्वितीय आदर्श बताया। उन्होंने कहा कि आंदोलन-ए-आशूरा की विजय में हज़रत ज़ैनब (स.ल.) की व्याख्या और प्रभावशाली संदेशों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
बुशहर प्रांत के महिला धार्मिक शिक्षण संस्थानों के प्रमुख ने हज़रत ज़ैनब (स.ल.) के व्यक्तित्व की विशेषताओं का विश्लेषण करते हुए सब्र और विवेकपूर्ण चिंतन को कर्बला के आंदोलन की स्थायी सफलता के दो बुनियादी स्तंभ बताया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सब्र और कठिनाइयों को सहन करने की क्षमता संघर्ष के मार्ग पर टिके रहने का आधार है, तो विवेक और दूरदर्शिता वह शक्ति है, जिसने ऐतिहासिक संकटों को इस्लाम के लिए बड़े अवसरों में बदल दिया।
उन्होंने आगे कहा कि धार्मिक शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को हज़रत ज़ैनब (स.) की इस विवेकपूर्ण सोच को अपनाते हुए जिहाद-ए-तबयीन के मार्ग पर आधुनिक साधनों और रचनात्मक तरीकों का इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि धर्म की सच्चाइयों को प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुँचाया जा सके।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने नए दाखिला लेने वाली छात्राओं को ईश्वरीय ज्ञान की शिक्षा प्राप्त करने के मार्ग पर कदम रखने के लिए बधाई दी। उन्होंने धार्मिक शिक्षा के इस स्थान को धर्म और राष्ट्र की सेवा करने तथा आख़िरत में अहले-बैत (अ.ल.) की महान महिलाओं की संगत प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण अवसर बताया।