इराक़ के धर्मगुरु आयतुल्लाह सय्यद मुहम्मद तकी मदरसी ने कहा है कि हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा की कुर्बानियों और उनके ऐतिहासिक रुख़ ने उम्मते इस्लामिया को भटकाव, गुमराही और पतन से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
आयतुल्लाह सय्यद मुहम्मद तकी मुदर्रेसी ने कहा कि हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (स.अ.) की कुर्बानियां और उनका ऐतिहासिक रुख़ इस्लामी उम्मत को विचलन और पतन से बचाने में महत्वपूर्ण रहे हैं।
उन्होंने कर्बला-ए-मुअल्ला में हौज़ा इल्मिया के विद्यार्थियों के लिए आयोजित साप्ताहिक नैतिकता की कक्षा में कहा कि हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (स.अ.) का अमर ख़ुत्बा एक व्यापक वैचारिक और धार्मिक व्यवस्था की बुनियाद है। इसमें इबादत की हिकमत, शरीयत के अहकाम और उसके बुनियादी उद्देश्यों को बयान किया गया है।
आयतुल्लाह मुदर्रेसी ने आगे कहा कि समाज की रक्षा और स्थिरता के लिए ईमान वालों, समाज के विभिन्न वर्गों तथा शैक्षिक एवं वैचारिक हस्तियों के बीच एकता और आपसी संबंध बेहद ज़रूरी हैं।