Print this page

यमनी मानवाधिकार आयोग का सऊदी अरब से सवाल,

Rate this item
(0 votes)
यमनी मानवाधिकार आयोग का सऊदी अरब से सवाल,

यमन के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने ताइज़ प्रांत के अश-शमायतैन जिले में स्थित मातृ एवं शिशु अस्पताल पर सऊदी युद्धक विमानों के सीधे हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे एक गंभीर युद्ध अपराध करार दिया है।

यमन के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने ताइज़ प्रांत के अश-शमायतैन जिले में स्थित मातृ एवं शिशु अस्पताल को सऊदी गठबंधन द्वारा सीधे निशाना बनाए जाने की कड़े शब्दों में निंदा की है।

आयोग ने अपने बयान में कहा कि यह नई सैन्य कार्रवाई यमनी जनता के खून से लिखे गए काले इतिहास में एक और अध्याय जोड़ती है। बयान के अनुसार, सऊदी युद्धक विमानों ने अश-शमायतैन जिले में स्थित मातृ एवं शिशु अस्पताल को सीधे और जानबूझकर निशाना बनाया।

बयान में कहा गया कि इस हमले में अस्पताल के कई महत्वपूर्ण विभाग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। इनमें नवजात शिशुओं का विभाग, प्रसूति विभाग और आपातकालीन चिकित्सा सेवा विभाग शामिल हैं। हमले के कारण अस्पताल पूरी तरह चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने में असमर्थ हो गया। यह हमला ऐसे समय में हुआ, जब अस्पताल गर्भवती महिलाओं, दूध पीते बच्चों और नवजात शिशुओं से भरा हुआ था।

यमनी मानवाधिकार आयोग ने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत संरक्षित किसी चिकित्सा केंद्र, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के लिए निर्धारित अस्पताल को निशाना बनाना न तो कोई सैन्य भूल थी और न ही लक्ष्य की पहचान में हुई गलती। आयोग के अनुसार, यह पूर्व नियोजित आपराधिक कार्रवाई और एक गंभीर युद्ध अपराध है। उसने इस संबंध में चौथे जिनेवा कन्वेंशन की धारा 18 और प्रथम अतिरिक्त प्रोटोकॉल की धारा 12 का हवाला देते हुए कहा कि अस्पतालों और चिकित्सा केंद्रों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत संरक्षण प्राप्त है।

आयोग ने सवाल उठाया कि सऊदी अरब इनक्यूबेटर में रखे एक नवजात शिशु और प्रसव के बिस्तर पर लेटी एक मां से आखिर क्या चाहता है?

बयान में आगे सवाल किया गया कि यह कैसी घृणित सैन्य रणनीति है, जिसके तहत एफ-16 और टाइफून जैसे युद्धक विमानों का इस्तेमाल एक मां और उसके बच्चे के रोने की आवाज को निशाना बनाने के लिए किया जाता है?

बयान में आरोप लगाया गया कि सऊदी अरब सअदा, सीमावर्ती क्षेत्रों, अल-जौफ और पश्चिमी तट सहित अन्य मोर्चों पर यमनी लड़ाकों का मुकाबला करने में विफल रहने के बाद अपनी हार की कड़वाहट और दुश्मनी का बदला महिलाओं और बच्चों के शरीर पर निकाल रहा है।

यमनी मानवाधिकार आयोग ने सऊदी सरकार के साथ-साथ उसे हथियार और गोला-बारूद उपलब्ध कराने वाले देशों तथा उसके राजनीतिक समर्थकों, विशेष रूप से अमेरिका और ब्रिटेन की सरकारों को भी इस अपराध के लिए पूरी तरह कानूनी और आपराधिक रूप से जिम्मेदार ठहराया।

आयोग ने संयुक्त राष्ट्र, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त, विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ की चुप्पी पर भी हैरानी जताई। उसने इन संस्थाओं से सवाल किया कि आखिर अब और कितनी देर तक चुप्पी साधे रखी जाएगी? जब स्कूलों को निशाना बनाया गया, तब भी तुम चुप रहे। जब बाजारों, कारखानों और खेतों पर हमले किए गए, तब भी तुम्हारी चुप्पी नहीं टूटी। अब प्रसूति अस्पताल को निशाना बनाया गया है, तो क्या कल किसी और स्थान पर हमला किया जाएगा?

बयान में आगे कहा गया कि अब उनकी चुप्पी को तटस्थता नहीं कहा जा सकता, बल्कि यह अपराध में भागीदारी के समान है। आयोग ने कहा कि चिंता व्यक्त करने वाले उनके बयानों का अब कोई महत्व नहीं रह गया है। वे उन गैस और रूई की कीमत के बराबर भी नहीं हैं, जिन पर अश-शमायतैन में माताओं का खून लगा हुआ है।

अंत में यमनी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जोर देकर कहा कि यमन को यह अधिकार है कि वह इस हमले में शामिल नेताओं को युद्ध अपराधियों के रूप में अंतरराष्ट्रीय अदालतों के समक्ष पेश करने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करे। आयोग ने यह भी कहा कि इन अपराधों पर समय बीत जाने से अभियोजन का अधिकार समाप्त नहीं होगा और न ही इनके लिए कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार समय की सीमा से बाधित होना चाहिए।

Read 5 times