इस्फहान के इमाम ए जुमआ आयतुल्लाह सैयद यूसुफ तबातबाई निजाद ने कहा कि अमेरिका के बार-बार वादाखिलाफी करने के बावजूद उसके साथ बातचीत स्वीकार करना एक रणनीतिक कदम है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय जनमत में ईरान को युद्ध का इच्छुक देश बताने की दुश्मन की कोशिशों को नाकाम करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस्लामी गणराज्य ईरान युद्ध नहीं चाहता, बल्कि केवल अपनी रक्षा करता है।
आयतुल्लाह सैयद यूसुफ तबातबाई निजाद ने इस्फहान के सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, पूर्व अनुभवी सैनिकों और व्यापारियों से मुलाकात के दौरान देश के राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर चर्चा की।
बातचीत का उद्देश्य दुनिया के सामने सच्चाई लाना है
अमेरिका के साथ दोबारा बातचीत के संबंध में उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि अमेरिका वादाखिलाफी करता है, लेकिन इसके बावजूद बातचीत स्वीकार करना एक रणनीतिक नीति है। यदि ईरान बातचीत से इनकार करता है तो दुश्मन अंतरराष्ट्रीय जनमत को यह विश्वास दिलाने की कोशिश करेगा कि ईरान युद्ध चाहता है, जबकि वास्तविकता यह है कि ईरान केवल अपनी रक्षा के लिए कदम उठाता है। हमारा उद्देश्य दुनिया के सामने सच्चाई स्पष्ट करना है।
रक्षा शक्ति देश की सुरक्षा की गारंटी है
आयतुल्लाह तबातबाई नजाद ने ईरान की रक्षा क्षमताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि दुश्मन के मुकाबले रक्षा शक्ति और सैन्य तैयारी बनाए रखना कुरआन के निर्देशों के अनुरूप है।
उन्होंने कहा कि आज कोई भी देश ईरान पर जमीनी हमला करने का साहस नहीं कर सकता, क्योंकि पवित्र रक्षा युद्ध के दौरान ईरानी युवाओं ने सीमित संसाधनों के बावजूद देश की एक इंच जमीन भी दुश्मन के हवाले नहीं होने दी।
हिजाब, पारिवारिक व्यवस्था और सामाजिक समस्याएं
हिजाब और पवित्रता संबंधी कानून के क्रियान्वयन पर उन्होंने कहा कि इस मामले में धार्मिक सिद्धांतों और देश के हितों को ध्यान में रखना आवश्यक है। कानून में मौजूद कमियों की भी समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने सरकारी संस्थानों के कर्मचारियों से व्यावहारिक रूप से इस्लामी सिद्धांतों का पालन करने का आग्रह किया।
आयतुल्लाह तबातबाई निजाद ने तलाक की बढ़ती दर के कारणों पर चर्चा करते हुए कहा कि शादी से पहले एक-दूसरे के व्यक्तित्व, धार्मिक मूल्यों और परिस्थितियों को समझना जरूरी है। गलत जीवनसाथी का चुनाव पारिवारिक समस्याओं और वैवाहिक जीवन के टूटने का कारण बन सकता है।
इस मुलाकात में उपस्थित लोगों ने प्रशासनिक भ्रष्टाचार समाप्त करने, मस्जिदों में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने, धार्मिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और जनसंगठनों की क्षमताओं से लाभ उठाने की मांगें भी रखीं।