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इबादत, नैतिकता और शरई अहकाम को व्यवस्थित करने में ज्ञान की बुनियादी भूमिका

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इबादत, नैतिकता और शरई अहकाम को व्यवस्थित करने में ज्ञान की बुनियादी भूमिका

इस्लाम की रिवायती शिक्षाओं में ज्ञान का स्थान केवल सैद्धांतिक विषयों तक सीमित नहीं है। पैग़म्बरे इस्लाम (स.) से वर्णित रिवायत के अनुसार, ज्ञान अल्लाह की आज्ञा का पालन और उसकी इबादत करने का माध्यम है। इसके द्वारा अल्लाह की पहचान से लेकर रिश्तेदारों के अधिकारों को निभाने तक के कार्य किए जाते हैं।

پیامبر خدا صلی الله علیه و آله:

بِالْعِلْمِ یُطَاعُ اَللَّهُ وَ یُعْبَدُ وَ بِالْعِلْمِ یُعْرَفُ اَللَّهُ وَ یُوَحَّدُ وَ بِهِ تُوصَلُ اَلْأَرْحَامُ وَ یُعْرَفُ اَلْحَلاَلُ وَ اَلْحَرَامُ وَ اَلْعِلْمُ إِمَامُ اَلْعَقْلِ

पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद (स) ने फ़रमाया:

“ज्ञान के माध्यम से अल्लाह की आज्ञा का पालन किया जाता है और उसकी इबादत की जाती है। ज्ञान के माध्यम से अल्लाह को पहचाना जाता है और उसे एक माना जाता है। इसी के माध्यम से रिश्तेदारों से अच्छे संबंध बनाए जाते हैं तथा हलाल और हराम की पहचान होती है। ज्ञान अक़्ल का इमाम है।”

तोहफ़ुल उक़ूल, पेज 28

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