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हज़रत फातिमा मासूमा (स.अ.) की ज़ियारत जन्नत में प्रवेश करने का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है

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हज़रत फातिमा मासूमा (स.अ.) की ज़ियारत जन्नत में प्रवेश करने का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है

हज़रत फ़ातिमा मासूमा (स.अ.) हज़रत इमाम मूसा काज़िम (अ.स.) की बेटी, हज़रत इमाम अली रज़ा (अ.स.) की बहन और इमाम मुहम्मद तकी जवाद (अ.स.) की फूपी हैं।

 हजरत फातिमा मासूमा (स.अ.) के धार्मिक और अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ मौलाना सैयद जाकिर हुसैन जाफरी और मेहर न्यूज एजेंसी उर्दू के संपादक ने मासूमा क़ुम के जन्म दिवस के मौके पर कहा कि हजरत फातिमा मासूमा (स.अ.) हज़रत इमाम मूसा काज़िम (अ.स.) की पुत्रि, हज़रत इमाम अली रज़ा (अ.स.) की बहन और इमाम मुहम्मद तकी जवाद (अ.स.) की फूपी हैं।

उनका जन्म मदीना में 173 एएच में हुआ था। आपकी माता का नाम नमजमा खातून था। वह इमाम मूसा काज़िम (अ) की सबसे बड़ी और सबसे प्रतिष्ठित बेटी थीं। प्रमुख धार्मिक विद्वान शेख अब्बास क़ुम्मी इस बारे में लिखते हैं: उसका नाम फातिमा है और आपकी सबसे प्रसिद्ध उपाधी मासूमा है। यह उपाधि उन्हें आठवें इमाम हज़रत अली रज़ा (अ.स.) ने दी थी। हालाँकि इमाम मूसा काज़िम (अ.) की लगातार गिरफ़्तारी और शहादत से समय ने पिता के प्यार और करुणा की छाया उनसे छीन ली थी, लेकिन उनके बड़े भाई के दयालु हाथों ने उनके दिल पर दुख के बादल नहीं मडराने दिए। हज़रत फ़ातिमा मासूमा बचपन से ही अपने बड़े भाई इमाम अली रज़ा के बहुत करीब थीं। इमाम जमाना को नवीनीकृत करने के इरादे से यात्रा पर निकल पड़े। और एक युद्ध छिड़ गया जो परिणामस्वरूप हज़रत के कई साथियों की शहादत हुई।आप कहा करते थे: क़ुम हमारे शियाओं का केंद्र है।

इस प्रकार हज़रत मासूमा (स.अ.) सावा से क़ुम पहुँची।
जब क़ुम के बुज़ुर्गों को इस ख़ुशख़बरी की खबर मिली तो वे हज़रत के स्वागत के लिए दौड़ पड़े। वह मूसा इब्न खजराज के निजी घर में उतरे।

हज़रत मासूमा (स.अ.) 17 दिनों तक क़ुम में रहीं और इस अवधि के दौरान वह हमेशा इबादत में लगी रहीं और अपने रब से राज़ो नियाज़ करती थीं।

क़ुम में, हज़रत फातिमा मासूमा (स.अ.) और उसकी धन्य कब्र, शिया अहलेबैत के दिलों का क़िबला और बीमारों का इलाज है।

हज़रत इमाम जवाद (अ.स.) का कहना है कि जो कोई भी मेरी फूपी की क़ुम में जियारत करेगा, वह जन्नत का हकदार होगा। हजरत इमाम जवाद (अ.स.) के इस बयान से स्पष्ट है कि हजरत फातिमा मासूमा (स.अ.) के ज्ञान के साथ ज़ियारत स्वर्ग में प्रवेश करने के महत्वपूर्ण दस्तावेजों में से एक है।

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