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हौज़ा, युवा छात्रों और शिक्षकों की जनता व युवाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और रणनीतिक है

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हौज़ा, युवा छात्रों और शिक्षकों की जनता व युवाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और रणनीतिक है

हौज़ा इल्मिया के प्रमुख आयतुल्लाह अली रज़ा आराफ़ी ने सेवा शिविरों के आयोजकों और कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा है कि मौजूदा संवेदनशील परिस्थितियों में जनता और युवाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर एक विकसित और उत्कृष्ट हौज़ा इल्मिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और रणनीतिक है। हौज़ा इल्मिया की जिम्मेदारी वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप समाज की वैचारिक और ज्ञानात्मक आवश्यकताओं को पूरा करना है।

 हौज़ा इल्मिया के प्रमुख आयतुल्लाह अली रज़ा आराफ़ी ने अपने संदेश में हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन मोहम्मद हसन जमशीदी तथा विभिन्न सेवा शिविरों के सभी जिम्मेदारों और आयोजकों का शिविर स्थापित करने, लोगों की सेवा करने तथा विभिन्न रचनात्मक कार्यक्रमों और गतिविधियों के आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया।

अपने संदेश में उन्होंने कहा:

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन मोहम्मद हसन जमशीदी और सभी सेवा शिविरों के प्रिय जिम्मेदारों एवं आयोजकों!

आप सभी को सलाम और सम्मान। अल्लाह तआला से आप सभी के लिए अधिक सफलता और तौफ़ीक़ की दुआ करता हूं।

मैं आवश्यक समझता हूं कि हौज़ा इल्मिया की ओर से आपकी तथा सेवा कार्यों में सक्रिय सभी शिविरों के कार्यकर्ताओं की हार्दिक सराहना और आभार व्यक्त करूं। विशेष रूप से क़ुम में स्थापित ‘इस्तिग़ासा’ सेवा शिविर और हज़रत सय्यदुश्शोहदा (अ.) मदरसे के सेवा शिविर के सभी जिम्मेदारों और कार्यकर्ताओं का धन्यवाद करता हूं।

इसी तरह मैं इन शिविरों की रचनात्मक गतिविधियों, विभिन्न कार्यक्रमों और सेवाओं तथा उनसे जुड़े प्रिय कार्यकर्ताओं और युवाओं के प्रयासों की भी सराहना करता हूं।

वास्तव में रमज़ान के दौरान थोपी गई जंग के साथ इस्लाम, ईरान और इस्लामी क्रांति के इतिहास में एक नया अध्याय खुला है। इस घटना के साथ इस्लामी क्रांति के विकास के सफर और इमाम ख़ुमैनी (र.) के दौर में निर्धारित इस्लामी क्रांति के वैश्विक और सभ्यतागत लक्ष्यों की दिशा में एक नया चरण शुरू हुआ है।

इस्लाम और ईरान, प्रतिरोध मोर्चे तथा विशेष रूप से शहीद रहबर और नेता इमाम सय्यद अली ख़ामेनेई (र.) के पवित्र रक्त से उठने वाली लहरों के कारण राष्ट्र और युवाओं में अभूतपूर्व जागरूकता पैदा हुई है। इस्लाम और ईरान के शहीदों, प्रतिरोध मोर्चे के शहीदों और विशेष रूप से शहीद रहबर इमाम ख़ामेनेई (र.) के पवित्र रक्त की बरकत से समाज और युवाओं में नई चेतना पैदा हुई है। सशस्त्र बलों और प्रतिरोध मोर्चे की बहादुरी, साहस तथा उल्लेखनीय प्रदर्शन और जिहादी भावना के साथ काम करने वाले जिम्मेदारों के प्रयासों ने भी इस नए दौर को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इसके परिणामस्वरूप क्षेत्र और दुनिया के अनेक समीकरण और आकलन बदल गए हैं। अल्लाह तआला की कृपा, ईरानी राष्ट्र, प्रतिरोध मोर्चे और उम्मते इस्लाम की उच्च भावना, सर्वोच्च रहबर की नेतृत्व क्षमता और मार्गदर्शन, मरजए तक़लीदों के मार्गदर्शन तथा सशस्त्र बलों के प्रयासों से यह तेज़ गति वाला आंदोलन आगे बढ़ता रहेगा और कुटिल एवं निर्दयी दुश्मनों, अमेरिका और ज़ायोनी दुश्मन तथा उनके सहयोगियों के अस्तित्व को समाप्त करेगा, इंशाअल्लाह।

ऐसे समय में एक विकसित और उत्कृष्ट हौज़ा इल्मिया तथा युवा छात्रों और शिक्षकों की जनता एवं युवाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर निभाई जाने वाली भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और रणनीतिक है।

उनकी जिम्मेदारी है कि वे मौजूदा परिस्थितियों और परिवर्तनों के अनुरूप इस नए दौर की वैचारिक, ज्ञानात्मक, भावनात्मक और आध्यात्मिक आवश्यकताओं को पूरा करें। साथ ही मौजूदा असमान और जटिल युद्ध की परिस्थितियों में मार्गदर्शन और प्रभावी भूमिका निभाएं, सही तथ्यों को स्पष्ट करें, सही और विश्वसनीय कथ्य प्रस्तुत करें, उत्साह एवं जज़्बा पैदा करें, जागरूकता बढ़ाएं, एकता और एकजुटता को मजबूत करें, ज्ञान और दूरदृष्टि को बढ़ावा दें तथा शैक्षिक, व्यावहारिक और प्रचारात्मक जिहाद का दायित्व निभाएं।

हमें राष्ट्र, युवाओं और हौज़ा इल्मिया की इन मौजूदा क्षमताओं और संसाधनों से उम्मीद रखनी चाहिए।

सभी मित्रों तक मेरा सलाम और आभार पहुंचा दीजिए।

दिल की गहराइयों से आप सभी का धन्यवाद।

अली रज़ा आराफ़ी
प्रमुख, हौज़ा इल्मिया

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