हरम-ए-मुतह्हर बनू-ए-करामत के खातीब ने ज़ियारत-ए-जामेआ कबीरा, ज़ियारत-ए-ग़दीरिया और ज़ियारत-ए-मुतलक़ा-ए-पंजुम अमीरुल मोमिनीन (अ.ल.) की उच्च शिक्षाओं की ओर संकेत करते हुए कहा कि इमाम ए हादी ने इस स्थायी विरासत में इमामत की वास्तविकता को स्पष्ट किया है और अहलुलबैत (अ.स.) के दृष्टिकोण से क़ुरआन की आयतों की व्याख्या करके मानवता के लिए हिदायत और ख़ुदा की पहचान का मार्ग उजागर किया है।
, हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन हिदायत ने हरम-ए-मुतह्हर बनू-ए-करामत में आयोजित फ़ातिमी तिलावत सभा में इमाम हादी (अ.स.) के जन्मदिवस के अवसर पर कहा कि इमाम हादी (अ.स.) ने तीन महत्वपूर्ण ज़ियारतों ज़ियारत-ए-जामेआ कबीरा, ज़ियारत-ए-ग़दीरिया और अमीरुल मोमिनीन अवी ईब्ने अबी तालिब की पाँचवीं मुतलक़ा ज़ियारत के माध्यम से सृष्टि के अनेक रहस्यों को बयान किया है।
उन्होंने कहा कि ये सभी ज़ियारतें क़ुरआन के अनुरूप हैं, क्योंकि इनमें क़ुरआनी आयतों का स्पष्ट उल्लेख भी है और अनेक आयतों की ओर संकेत भी किया गया है।
हरम के वक्ता ने ज़ोर देते हुए कहा कि इमामत की हक़ीक़त मानवता के लिए सबसे बड़ी नेमत है, और इमाम हादी (अ.) ने इन तीनों ज़ियारतों में इस महान नेमत की ओर विशेष रूप से ध्यान दिलाया है।
उन्होंने कहा कि इमाम हादी (अ.स.) ने इन ज़ियारतों में ऐसे अनमोल आध्यात्मिक मोती प्रस्तुत किए हैं, जिनके बारे में सही पहचान और समझ विकसित करना आवश्यक है।हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन हिदायत ने कहा कि जो व्यक्ति ख़ुदा को पहचान लेता है, वह सृष्टि के उद्देश्य अर्थात बंदगी तक पहुँच जाता है, और ख़ुदा की पहचान का एक महत्वपूर्ण मार्ग ज़ियारत-ए-जामेआ कबीरा को समझना है।
उन्होंने आगे कहा कि हम प्रतिदिन अपनी नमाज़ों में सूरह अल-फ़ातिहा के माध्यम से सीरत-ए-मुस्तक़ीम की हिदायत की दुआ करते हैं, और इमाम हादी (अ.स.) फ़रमाते हैं कि हम अहलुलबैत (अ.स.) ही सीरत-ए-मुस्तक़ीम हैं।
उस्ताद-ए-हौज़ा ने कहा कि समाज में मासूम इमाम और वास्तविक मार्गदर्शक का इंकार इंसान को अल्लाह के ग़ज़ब का पात्र बना देता है। इमाम हादी (अ.) के कथन के अनुसार, जो व्यक्ति अहले बैत (अ.स.) के दामन से दूर हो जाता है, वह सत्य की दुनिया से वंचित हो जाता है।
उन्होंने अंत में कहा कि इमाम हादी (अ.स.) ने ज़ियारत-ए-जामेआ कबीरा में अहले बैत (अ.स.) की दृष्टि से क़ुरआन की आयतों की व्याख्या की है और बंदों के लिए सत्य को स्पष्ट कर दिया है।













