हमास के वरिष्ठ नेता उसामा हमदान ने कहा कि ख़लील अल-हय्या का हमास के राजनीतिक ब्यूरो के प्रमुख के रूप में चयन इस आंदोलन की सक्रियता और फ़िलिस्तीनी जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए प्रतिरोध के मार्ग पर आगे बढ़ने के दृढ़ संकल्प का प्रतीक है।
अलमयादीन से बातचीत में हमदान ने कहा कि ख़लील अल-हय्या का सर्वसम्मति से चयन इस बात का संदेश देता है कि नेतृत्व में चाहे कोई भी हो, हमास प्रतिरोध की नीति पर कायम रहेगा।
उन्होंने कहा कि ख़लील अल-हय्या को हमास के विभिन्न स्तरों पर व्यापक अनुभव है और वे वार्ता प्रक्रिया के प्रमुख चेहरों में रहे हैं। उनका अनुभव ग़ाज़ा में जारी युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों में सहायक हो सकता है।
हमदान ने दावा किया कि फ़िलिस्तीनी जनता के अधिकारों की बहाली के लिए प्रतिरोध ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने यह भी कहा कि ख़लील अल-हय्या पिछले 20 वर्षों से लगातार धमकियों और हत्या के प्रयासों का सामना करते हुए डटे रहे हैं।
उन्होंने बताया कि हमास ने अपने कई नेताओं की हत्या के बाद संगठनात्मक ढांचे को पुनर्गठित किया है और प्रतिरोध के अभियान को जारी रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं।हमदान ने हमास की आंतरिक एकता को उसकी सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में नेतृत्व की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
फ़िलिस्तीनी आंतरिक राजनीति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि हमास ने राष्ट्रीय और प्रतिरोध समर्थक रुख अपनाया है, जबकि फ़िलिस्तीनी प्राधिकरण (फ़िलिस्तीनी अथॉरिटी) इस दिशा में पीछे रह गया है। इसके बावजूद हमास फ़िलिस्तीनी गुटों के बीच मतभेद समाप्त कर एकजुटता स्थापित करने के लिए तैयार है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका और इज़राइल,क्षेत्र का प्रमुख केंद्र बनाने के उद्देश्य से पूरे पश्चिम एशिया को अपने प्रभाव में लाना चाहते हैं, जबकि हमास फ़िलिस्तीन के मुद्दे के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने के प्रयास जारी रखे हुए है।
अंत में हमदान ने कहा कि ईरान, यमन और लेबनान का प्रतिरोध फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध के सबसे प्रमुख समर्थकों में शामिल रहा हैं और उन्होंने केवल राजनीतिक समर्थन ही नहीं, बल्कि उससे आगे बढ़कर भी सहयोग किया है।













