ईरान आज भी दुनिया में आध्यात्मिकता और मानवीय मूल्यों का केंद्र है: हिंदू नेता श्री स्वामी सारंग

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ईरान आज भी दुनिया में आध्यात्मिकता और मानवीय मूल्यों का केंद्र है: हिंदू नेता श्री स्वामी सारंग

आशूरा को मानवता की जागरूकता की लहर बताते हुए उन्होंने कहा: इमाम हुसैन (अ) का संदेश आज भी दुनिया भर के स्वतंत्रता-प्रेमियों के लिए मार्गदर्शक प्रकाश है।

भारत की विश्व शांति फाउंडेशन के अध्यक्ष और हिंदू नेता श्री स्वामी सारंग ने ईरान को "प्रतिरोध, शांति और धैर्य की भूमि" बताते हुए कहा है कि ईरान ने वैश्विक ताकतों के कृत्रिम दबदबे को तोड़कर यह साबित कर दिया है कि वह आज भी दुनिया में आध्यात्मिकता और मानवीय मूल्यों का केंद्र है।

सुप्रीम लीडर की अंतिम यात्रा के मारोह में भाग लेने के लिए ईरान आए श्री स्वामी सारंग ने कहा कि ईरान ने हमेशा युद्ध और रक्तपात से परहेज करते हुए मानवीय और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा दिया है। उनका कहना था कि कोई भी देश या ताकत मनुष्य की गरिमा, सम्मान और समृद्धि को प्रतिबंधों या दबाव के जरिए सीमित नहीं कर सकती।

उन्होंने आशूरा की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि कर्बला केवल इतिहास की एक घटना नहीं है, बल्कि एक ऐसी सार्वभौमिक मानवीय लहर है जिसकी नींव न्याय, नैतिकता और मानवीय मूल्यों पर टिकी है। उन्होंने कहा कि हज़रत इमाम हुसैन (अ) का संदेश आज भी दुनिया भर के स्वतंत्रता-प्रेमियों और न्याय के झंडाबरदारों के लिए प्रेरणास्रोत है।

श्री स्वामी सारंग ने ईरान में नंगे पैर चलने का कारण बताते हुए कहा कि यह कार्य हज़रत इमाम हुसैन (अ) से श्रद्धा और कर्बला की कुर्बानियों को श्रद्धांजलि देने का प्रतीक है। उनके अनुसार, इस यात्रा का प्रत्येक कदम उनके लिए इबादत और आशूरा के मानवीय एवं ईश्वरीय संदेश के साथ नए सिरे से प्रतिज्ञा करने के समान है।

इस हिंदू नेता ने ईरानी जनता की प्रशंसा करते हुए कहा कि ईरान एक प्राचीन सभ्यता, महान संस्कृति और शानदार ऐतिहासिक विरासत वाला देश है। उन्होंने कहा कि ईरानी राष्ट्र ने अपने चरित्र और जीवनशैली से यह साबित किया है कि वह मानवीय गरिमा, आध्यात्मिक मूल्यों और नैतिक सिद्धांतों का संरक्षक है।

उन्होंने आगे कहा कि ईरानी राष्ट्र अत्याचार के खिलाफ धैर्य, आत्म-सम्मान और मानवीय गरिमा का प्रतीक है। जो राष्ट्र न्याय, मानवीय मूल्यों और नैतिक सिद्धांतों पर दृढ़ रहते हैं, वे प्रतिबंधों, दबाव और कठिनाइयों के बावजूद कभी हार नहीं मानते।

श्री स्वामी सारंग ने शहीद रहबर-ए-इंकिलाब-ए-इस्लामी हज़रत आयतुल्लाह सय्यद अली खामेनई को वर्तमान युग की प्रभावशाली शख्सियतों में शुमार करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा मानवीय मूल्यों, न्याय और राष्ट्रों की गरिमा एवं सम्मान पर जोर दिया, जिसके कारण दुनिया के विभिन्न देशों की जनता और बुद्धिजीवी उनके व्यक्तित्व को सम्मान की दृष्टि से देखते हैं।

उन्होंने कहा कि वे इस समारोह में केवल एक मेहमान के रूप में नहीं, बल्कि ईरानी जनता के दुख में शामिल होने और उनके प्रति सहानुभूति व्यक्त करने के लिए शामिल हुए हैं।

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