सूरह तौहीद और मौला अमीरुल मोमिनीन के बारे में इमाम ख़ुमैनी की विशेष हिदायत

Rate this item
(0 votes)
सूरह तौहीद और मौला अमीरुल मोमिनीन के बारे में इमाम ख़ुमैनी की विशेष हिदायत

आयतुल्लाह कश्मीरी ने एक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि नजफ़ अशरफ़ में हाज आका मुस्तफ़ा ख़ुमैनी से मुलाकात के दौरान उन्होंने पूछा कि आप कौन-सा ज़िक्र पढ़ रहे हैं? उन्होंने जवाब दिया कि मैं सूरह तौहीद पढ़ रहा हूँ। इस पर उन्होंने बताया कि उनके पिता इमाम ख़ुमैनी ने उन्हें प्रतिदिन एक हज़ार बार सूरह तौहीद पढ़ने और उसका सवाब अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली अलैहिस्सलाम को भेंट करने की ताकीद फ़रमाई थी।

आयतुल्लाह कश्मीरी फ़रमाते हैं:

नजफ़ अशरफ़ में हाज आका मुस्तफ़ा ख़ुमैनी मेरे पास आया करते थे और लगातार ज़िक्र में व्यस्त रहते थे। एक दिन मैंने उनसे पूछा: “आका मुस्तफ़ा! आप कौन-सा ज़िक्र पढ़ रहे हैं?”

उन्होंने जवाब दिया: “मैं सूरह तौहीद पढ़ रहा हूँ।”

इसके बाद उन्होंने बताया: “मेरे पिता ने फ़रमाया है कि प्रतिदिन एक हज़ार बार सूरह ‘क़ुल हुवल्लाहु अहद’ पढ़ो और उसका सवाब हज़रत अमीरुल मोमिनीन अलैहिस्सलाम को भेंट करो, क्योंकि अमीरुल मोमिनीन अलैहिस्सलाम तौहीद की अस्ल हैं।”

यह रिवायत इमाम ख़ुमैनी की अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली अलैहिस्सलाम से गहरी आध्यात्मिक श्रद्धा और तौहीद के साथ विलायत-ए-अलवी के आपसी संबंध की ओर संकेत करती है।

Read 2 times