हुज्जतुल-इस्लाम हसन अलीदादी सुलैमानीः मस्जिदों को युवा पीढ़ी के प्रशिक्षण का केंद्र बनाया जाना चाहिए

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हुज्जतुल-इस्लाम हसन अलीदादी सुलैमानीः मस्जिदों को युवा पीढ़ी के प्रशिक्षण का केंद्र बनाया जाना चाहिए

हुज्जतुल-इस्लाम हसन अलीदादी सुलैमानी ने विश्व मस्जिद दिवस के अवसर पर एक संदेश जारी किया। उन्होंने मस्जिद को केवल इबादत का स्थान न मानते हुए इसे ईश्वरीय मूल्यों के प्रचार, सामाजिक एकता और उच्च विचारों के विकास का केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि मस्जिदों की भूमिका को इस्लामी व्यवस्था के स्तर तक पहुँचाने और अधिक से अधिक युवा पीढ़ी को उनसे जोड़ने के लिए प्रयास करना आवश्यक है।

उन्होने अपने संदेश मे कहा कि 22 अगस्त को मनाए जाने वाले “विश्व मस्जिद दिवस” के अवसर पर मैं इस दिन की शुभकामनाएँ देता हूँ। यह दिन अल-अक्सा मस्जिद को आग लगाने के ज़ायोनी शासन के अपराध की याद दिलाता है और इस कब्ज़ा करने वाले शासन की दुष्ट प्रकृति को उजागर करता है।

मस्जिद केवल इबादत करने की जगह नहीं है, बल्कि यह ईश्वरीय मूल्यों को बढ़ावा देने, सामाजिक एकता और भाईचारे को मजबूत करने तथा उच्च विचारों के विकास का केंद्र भी है। हमारी इस्लामी क्रांति की शुरुआत मस्जिदों से हुई थी और आज भी ये पवित्र स्थान समाज की समस्याओं को दूर करने के लिए जनता के सबसे महत्वपूर्ण केंद्रों में से एक हैं। मस्जिद समाज की अनेक सामाजिक समस्याओं को हल करने में देश की सहायता कर सकती है।

आज हमारी जिम्मेदारी है कि आपसी सहयोग और विचार-विमर्श के साथ मस्जिदों को उस स्थान तक पहुँचाएँ जो इस्लामी व्यवस्था के सम्मान और स्तर के अनुरूप हो। हमें मस्जिदों को युवा पीढ़ी को आकर्षित करने और उनके प्रशिक्षण का केंद्र बनाना चाहिए तथा योजनाबद्ध तरीके से उन्हें विकास और उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ाना चाहिए।

मैं सभी इमामे जमाअत, मस्जिदों की प्रबंध समितियों के सदस्यों, सेवकों और मस्जिद के क्षेत्र में सक्रिय सभी लोगों का दिल से आभार व्यक्त करता हूँ, जो प्रेम और ईमान के साथ इस मार्ग पर कार्य कर रहे हैं।

हम अल्लाह तआला से दुआ करते हैं कि वह हम सभी को ईमान के इन मोर्चों की सेवा करने में सफल और समर्थ बनाए।

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