हुज्जतुल इस्लाम सय्यद अब्दुलहादी रुकनी हुसैनी के उस संदेश पर आधारित है, जिसमें उन्होंने पैगंबर-ए-अकरम (स.) और इमाम जाफर सादिक (अ.) के जन्मदिवस तथा सप्ताहे एकता के अवसर पर मुसलमानों के बीच एकता और भाईचारे की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम (स.) का आगमन मानवता के लिए बहुत बड़ी नेमत था। आपके आगमन से अज्ञानता, मूर्तिपूजा और अन्य सामाजिक बुराइयों के खिलाफ एक नए युग की शुरुआत हुई। अल्लाह ने पैगंबर (स.) को रहमान और रहीम जैसी विशेषताओं से सम्मानित किया और उन्हें पूरी मानवता के लिए रहमत बनाया।
उन्होंने कहा कि सप्ताहे एकता का मुख्य उद्देश्य मुसलमानों के बीच आपसी प्रेम, एकता, भाईचारे और सहयोग को मजबूत करना है। आज दुश्मन मुसलमानों के बीच मतभेद और फूट पैदा करके इस्लामी उम्मत की शक्ति को कमजोर करना चाहता है। इसलिए शिया और सुन्नी सहित सभी मुसलमानों को आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुट रहना चाहिए और दुश्मन को अपनी एकता का गलत फायदा उठाने का अवसर नहीं देना चाहिए।
रुकनी हुसैनी ने हाल के युद्धों का उल्लेख करते हुए कहा कि जनता की एकता और प्रतिरोध के कारण दुश्मन को सैन्य क्षेत्र में असफलता मिली है। अब वह आर्थिक दबाव के जरिए ईरानी जनता को परेशान करने की कोशिश कर रहा है। आर्थिक समस्याओं और महंगाई के माध्यम से समाज में असंतोष पैदा करना भी उसकी साजिश का हिस्सा है। उन्होंने विश्वास जताया कि ईरानी जनता एकता और दृढ़ता के साथ इस चुनौती का भी सामना करेगी।
एकता सप्ताह के अवसर पर उन्होंने कहा कि इमाम खुमैनी (र.) देश की समस्याओं का समाधान मजबूत बनने में मानते थे। इसलिए मजबूत राष्ट्र के लिए सक्षम और मजबूत सरकार आवश्यक है। अंत में उन्होंने सभी अधिकारियों और जनता से देश को मजबूत बनाने, समस्याओं को दूर करने तथा सामाजिक एकता और भाईचारे को बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मुसलमानों की एकता ही दुश्मन की साजिशों का सबसे प्रभावी जवाब है और अल्लाह अपने बंदों को विजय और सफलता प्रदान करेगा।













