मस्जिदों को इस्लामी आदर्श और युवा पीढ़ी की तरबीयत का केंद्र होनी चाहिए।हुज्जतुल-इस्लाम हसन मुस्लेह

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मस्जिदों को इस्लामी आदर्श और युवा पीढ़ी की तरबीयत का केंद्र होनी चाहिए।हुज्जतुल-इस्लाम हसन मुस्लेह

हुज्जतुल इस्लाम हसन मुस्लेह ने कहा, मस्जिद अहले-बैत (अ.) में नमाज़ियों की सभा को संबोधित करते हुए संस्थापक इमाम ख़ुमैनी (रह.) और इस्लामी गणराज्य ईरान के शहीदों, विशेष रूप से शहीद इमाम आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली हुसैनी ख़ामेनेई (रह.) की याद को श्रद्धांजलि अर्पित की।

उन्होंने इस्लाम में मस्जिद के विशेष स्थान की ओर इशारा करते हुए कहा कि मस्जिद केवल नमाज़ की अदायगी तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि आदर्श इस्लामी मस्जिद को सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र तथा युवा पीढ़ी की तरबीयत का माध्यम बनना चाहिए।

देशभर की मस्जिदों के सक्रिय कार्यकर्ताओं के सम्मान के चौथे राष्ट्रीय समारोह में बराज़जान की जामे मस्जिद अहले-बैत (अ.) को सर्वश्रेष्ठ मस्जिद का ख़िताब मिलने का उल्लेख करते हुए कहा कि तीनों वक्त जमाअत के साथ नमाज़ का आयोजन, बराज़जान के नमाज़-ए-जुमआ मुख्यालय की निरंतर गतिविधियां, प्रतिरोधी बसीज केंद्र, सांस्कृतिक एवं कलात्मक केंद्र और, खेल क्लब तथा किशोरों और युवाओं को सक्रिय रूप से जोड़ना इस मस्जिद को इस्लामी क्रांति की आदर्श मस्जिद चुने जाने के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।

कार्यक्रम के अंत में हुज्जतुल-इस्लाम मुस्लेह ने नमाज़ियों, मस्जिद के प्रबंधकों, मस्जिद के इमाम-ए-जमाअत हुज्जतुल-इस्लाम अहमदपुर और मुहम्मदज़ादेह, बसीज प्रतिरोध केंद्रों, सांस्कृतिक एवं कलात्मक केंद्र तथा उन किशोरों और युवाओं का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने इस सम्मान को हासिल करने के लिए दिन-रात मेहनत की।

इस कार्यक्रम में बराज़जान की जाम ए मस्जिद अहले-बैत (अ.स.) को चौथे राष्ट्रीय मस्जिद सम्मान समारोह में सर्वश्रेष्ठ मस्जिद का ख़िताब मिलने के उपलक्ष्य में तैयार विशेष पट्टिका भी बराज़जान के इमाम-ए-जुमआ द्वारा मस्जिद के इमाम-ए-जमाअत, मस्जिद के प्रबंधकों और मुअज़्ज़िन को प्रदान की गई।

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