खुर्माबाद में आयोजित ‘शाहिद-136’ डॉक्यूमेंट्री से जुड़े लोगों के सम्मान समारोह में बोलते हुए ब्रिगेडियर जनरल अली बिलाली ने कहा कि उन्हें बहादुर लुरिस्तान की जनता के बीच मौजूद होने पर खुशी है। उन्होंने कहा कि लुरिस्तान के बहादुर लोगों ने आठ साल के ईरान-इराक युद्ध, 12-दिवसीय युद्ध और रमज़ान युद्ध के दौरान यह साबित किया है कि उनकी देशभक्ति, मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता और दृढ़ता आज भी कायम है।
उन्होंने शहीद नेता के उस कथन का उल्लेख किया कि लुर लोगों का संघर्ष सुनने से अधिक देखने योग्य है। उन्होंने कहा कि लुरिस्तान के बेटे शहीद ताहेरपुर ने अपनी शहादत तक इस्लामी क्रांति और व्यवस्था के लिए उल्लेखनीय सेवाएं प्रदान कीं।
ईरान की एकता ने देश को मजबूत बनाया:
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के एयरोस्पेस कमांडर के वरिष्ठ सलाहकार ने समाज के विभिन्न वर्गों के बीच समन्वय और एकता का उल्लेख करते हुए कहा कि इन दिनों देश के लोगों ने मीडिया, बिजली और सड़क जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए साबित किया है कि वे देश के लिए अपनी जान तक देने को तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि ईरान में मौजूद विभिन्न जातीय समुदाय एक इंद्रधनुष की तरह हैं। हर समुदाय की अपनी विशेष पहचान और रंग है, लेकिन इन सभी ने मिलकर ऐसी एकता पैदा की है जिसे किसी भी तरह तोड़ा नहीं जा सकता।
शहीद ताहेरपुर का एयरोस्पेस क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान
जनरल बिलाली ने कहा कि लुरिस्तान में सेवा करना उनके लिए गौरव की बात रही है और 1990 के दशक के अंतिम वर्षों में यहां उनकी सेवा अवधि उनके करियर के सबसे अच्छे दौरों में से एक थी।
उन्होंने बताया कि शहीद ताहेरपुर ने एयरोस्पेस के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए। शाहिद-136 ड्रोन भी उनके कार्यों में शामिल था। इसके अलावा उन्होंने प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में छात्रों को शिक्षा दी।
मिसाइल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता
जनरल बिलाली ने कहा कि कई वर्ष पहले ईरान के पास विदेश से आए केवल दो लॉन्चिंग प्लेटफॉर्म थे, जिनसे मिसाइल अभ्यास किया जाता था। लेकिन बाद में स्थिति इतनी बदली कि ‘वादा-ए-सादिक़-1’ और ‘वादा-ए-सादिक़-2’ अभियानों में एक साथ सैकड़ों मिसाइलें ईरान से लॉन्च की गईं।
उन्होंने कहा कि शहीदों के प्रयासों से पूरे देश में क्षमताओं का विस्तार हुआ है और आज मिसाइल तथा ड्रोन के क्षेत्र में इस्लामी गणराज्य ईरान की शक्ति स्थायी है।
उन्होंने दावा किया कि यदि ईरान को पूरी तरह घेरकर कंक्रीट की दीवार और कांटेदार तार भी लगा दिए जाएं, तब भी मिसाइल और ड्रोन का उत्पादन नहीं रोका जा सकता, क्योंकि यह शक्ति देश के भीतर विकसित हुई है।
जनरल बिलाली ने शहीद हसन तेहरानी मुक़द्दम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि अगर उनके प्रयास नहीं होते तो आज ईरान की स्थिति क्या होती, यह कहना मुश्किल था। उन्होंने कहा कि आज ईरान इस विश्वास तक पहुंच चुका है कि “हम कर सकते हैं और हमें किसी पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने कहा कि जो देश कभी कांटेदार तार तक आयात करने में सक्षम नहीं था, आज उस पर यह दबाव डाला जा रहा है कि वह निर्यात न करे। उन्होंने यह भी दावा किया कि विरोधियों ने कई बार ईरान द्वारा इस्तेमाल किए गए ड्रोन की तकनीक की नकल की है।
अंत में जनरल बिलाली ने कहा कि शहीद ताहेरपुर जैसे प्रतिभाशाली लोग पूरे ईरान में मौजूद हैं। ईरान एक समृद्ध और क्षमतावान देश है और इसकी जनता देश को ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सक्षम है।उन्होंने विशेष रूप से एयरोस्पेस क्षेत्र के शहीदों के परिवारों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन परिवारों ने अपने घरों में सुरक्षित और शांत वातावरण प्रदान करके कमांडरों को पूरी एकाग्रता के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाने का अवसर दिया, जिसका परिणाम आज देश की उपलब्धियों के रूप में सामने है।













