दक्षिणी लेबनान पर इज़राइली शासन के हवाई और तोपखाने के हमले इतने तीव्र रहे कि देश के बड़े हिस्से में ज़मीन हिलने लगी और लोग अपने घरों से निकलकर सड़कों पर आ गए।
दक्षिणी लेबनान के अल-ख़ियाम और आसपास के इलाक़ों में बेहद शक्तिशाली विस्फोट हुए, जिनसे बड़े क्षेत्र में ज़मीन हिलने की स्थिति पैदा हो गई। ये विस्फोट इज़राइली शासन के भारी हवाई और तोपखाने के हमलों के बाद हुए।
इसी दौरान इज़राइली शासन ने ज़ूतर बस्ती के पूर्वी इलाक़ों को भी भारी तोपखाने के हमलों का निशाना बनाया। इसके अलावा अल-नबातिया अल-फ़ौक़ा क्षेत्र पर हवाई हमले की भी सूचना मिली है, जहां दागी गई एक मिसाइल में विस्फोट नहीं हुआ।
स्थानीय सूत्रों ने अल-मनसूरी क्षेत्र पर तीन भीषण हवाई हमलों की भी जानकारी दी है। हालांकि, इन इलाक़ों में संभावित नुकसान और हताहतों की संख्या के बारे में अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, इज़राइली शासन ने 2 मार्च से लेबनान के खिलाफ व्यापक सैन्य कार्रवाई शुरू की है, जिसके कारण बड़ी संख्या में लेबनानी नागरिकों की मौत और घायल होने की खबर है। इसके अलावा दस लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं और दक्षिणी लेबनान के कुछ हिस्सों पर कब्ज़ा किया गया है।
यह हमले ऐसे समय में हो रहे हैं जब लेबनान और इज़राइली शासन ने जुलाई 2026 की शुरुआत में, अमेरिका की मध्यस्थता से, संघर्ष समाप्त करने के उद्देश्य से एक “फ्रेमवर्क समझौते” पर हस्ताक्षर किए थे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि तेल अवीव ने इस समझौते के बावजूद अब तक अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरी तरह लागू नहीं किया है और दक्षिणी लेबनान में सैन्य हमलों के साथ-साथ बुनियादी ढांचे और रिहायशी इलाक़ों को निशाना बनाना जारी रखा है।













