यमन की सर्वोच्च राजनीतिक परिषद के अध्यक्ष मेहदी अल-मशात ने 26 सितंबर की क्रांति की 64वीं वर्षगांठ के अवसर पर दिए गए भाषण में सऊदी अरब पर यमन के आंतरिक मामलों में लंबे समय से हस्तक्षेप करने और देश को कमजोर बनाए रखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि, यमन पिछले वर्षों से सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य दबाव और नाकेबंदी का सामना कर रहा है तथा इसमें अमेरिका का समर्थन भी शामिल है।
,यमन की सर्वोच्च राजनीतिक परिषद के अध्यक्ष मेहदी अल-मशात ने 26 सितंबर की क्रांति की 64वीं वर्षगांठ के अवसर पर दिए गए भाषण में सऊदी अरब पर यमन के आंतरिक मामलों में लंबे समय से हस्तक्षेप करने और देश को कमजोर बनाए रखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि, यमन पिछले वर्षों से सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य दबाव और नाकेबंदी का सामना कर रहा है तथा इसमें अमेरिका का समर्थन भी शामिल है।
अल-मशात के अनुसार, सऊदी अरब पिछले 64 वर्षों से यमन की राजनीति, सरकारी संस्थाओं और राष्ट्रीय निर्णयों को प्रभावित करने की कोशिश करता रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि, सऊदी नीति का उद्देश्य यमन को एक मज़बूत और स्वतंत्र देश बनने से रोकना तथा उसके तेल, गैस और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के विकास में बाधा डालना रहा है।
उन्होंने सऊदी अरब को अमेरिकी और इस्राईली रणनीतिक परियोजना का हिस्सा बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य अरब और मुस्लिम देशों को कमजोर तथा विभाजित रखना है। ये आरोप अल-मशात के राजनीतिक वक्तव्य के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं।
उन्होंने 21 सितंबर की यमनी क्रांति के बाद सऊदी अरब द्वारा किए गए सैन्य हस्तक्षेप का उल्लेख करते हुए दावा किया कि, सऊदी पक्ष यमन की जनता पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने में सफल नहीं हुआ। उन्होंने यमनी नेतृत्व और सेना को स्वतंत्र तथा मज़बूत बताते हुए कहा कि, देश की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
भाषण में मक्का और अल-अक्सा मस्जिद का मुद्दा भी प्रमुख रहा। अल-मशात ने यमन पर मक्का की ओर हमला करने के सऊदी आरोपों को ख़ारिज करते हुए उन्हें झूठा बताया। उन्होंने कहा कि, यमनी जनता इस्लामी पवित्र स्थलों की रक्षा के लिए तैयार है। साथ ही उन्होंने उन देशों की आलोचना की, जो यमन के ख़िलाफ़ सऊदी आरोपों का समर्थन करते हैं, और उनसे अल-अक्सा मस्जिद के मुद्दे पर भी व्यावहारिक क़दम उठाने की मांग की।
नौवहन के मुद्दे पर अल-मशाअत ने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात सुरक्षित है और यमन अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करता है। उन्होंने कहा कि, यमनी सैन्य अभियान सऊदी लक्ष्यों पर केंद्रित हैं और अंतरराष्ट्रीय नौवहन से उनका संबंध नहीं है
अंत में उन्होंने सऊदी पक्ष के साथ खड़े यमनी लोगों से अपना रुख बदलकर देश लौटने की अपील की तथा दक्षिणी और पूर्वी यमन के लोगों के अधिकारों की रक्षा का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि यमन अपने हितों और संप्रभुता की रक्षा के लिए प्रयास जारी रखेगा।













