आज़रबाइजान में हिजाब पर प्रतिबंध

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आज़रबाइजान में हिजाब पर प्रतिबंध

आज़रबाइजान गणराज्य के स्कूलों में इस्लामी हिजाब पहनने पर पाबंदियों के बाद कई छात्राओं ने हिजाब पहनने वाली अपनी सहपाठियों के समर्थन में कक्षाओं में जाने से इनकार कर दिया है। इन पाबंदियों के खिलाफ विभिन्न स्कूलों में विरोध

 सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों ने हिजाब पहनने वाली छात्राओं की तस्वीरें और वीडियो साझा किए। उन्होंने इस बात पर नाराजगी जताई कि धार्मिक पहनावे को लड़कियों को शिक्षा से वंचित करने का कारण बनाया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट में दावा किया गया कि छात्राओं को हिजाब के बारे में फैसला करने के लिए सप्ताह की शुरुआत तक का समय दिया गया है। इसके साथ ही उन पर दबाव डाले जाने के दावे भी सामने आए। कुछ पोस्ट में चेतावनी दिए जाने की बात कही गई कि हिजाब पहनने पर कायम रहने से उनका शैक्षणिक भविष्य प्रभावित हो सकता है।

कराबाख युद्ध में मारे गए एक व्यक्ति की मां को हिजाब पहनने के कारण स्कूल में प्रवेश से रोके जाने की खबर ने भी सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं में नाराजगी बढ़ा दी।

हिजाब और धार्मिक स्वतंत्रता पर बहस

इन घटनाओं के बाद सोशल मीडिया पर इस कदम की आलोचना तेज हो गई। कुछ कार्यकर्ताओं ने इसे अजरबैजान में धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित करने वाला कदम बताया। उन्होंने स्कूलों में हिजाब पर पाबंदी के कारणों को स्पष्ट करने और छात्राओं तथा शिक्षिकाओं के धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करने के अधिकार की गारंटी देने की मांग की।

उनका कहना था कि हिजाब पहनने के कारण किसी छात्रा या शिक्षिका को स्कूल से बाहर नहीं किया जाना चाहिए और न ही उसे शिक्षा से वंचित किया जाना चाहिए।

कुछ ब्लॉगर्स ने भी कहा कि हिजाब पहनने को लड़कियों को शिक्षा से दूर रखने का बहाना नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षा का अधिकार और धार्मिक आस्था के अनुसार जीवन जीने का अधिकार एक-दूसरे के विरोधी नहीं होने चाहिए। स्कूलों के नियमों का इस्तेमाल छात्राओं की धार्मिक पसंद के आधार पर उन्हें शिक्षा से वंचित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

महिला अधिकार संगठनों की भूमिका पर सवाल

इस बहस के बीच सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं ने महिला अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों से भी सवाल किया कि स्कूलों में हिजाब पहनने वाली महिलाओं और छात्राओं को प्रवेश से रोके जाने के मामले में उनका क्या रुख है।

कार्यकर्ताओं का कहना था कि महिलाओं के अधिकारों और अपनी पसंद से निर्णय लेने की स्वतंत्रता की रक्षा में उन महिलाओं को भी शामिल किया जाना चाहिए, जिन्होंने अपनी इच्छा से हिजाब पहनने का फैसला किया है।

इंटरनेट की गति धीमी होने की शिकायतें

हिजाब को लेकर बहस तेज होने के बीच कुछ उपयोगकर्ताओं ने आज़रबाइजान मे इंटरनेट की गति धीमी होने की शिकायतें भी की हैं। विशेष रूप से इंस्टाग्राम, टिकटॉक और वीडियो साझा करने वाले अन्य एप्लिकेशन के इस्तेमाल में इंटरनेट की धीमी गति की शिकायतें सामने आई हैं।

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