बरकत केवल धन-दौलत की अधिकता का नाम नहीं

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बरकत केवल धन-दौलत की अधिकता का नाम नहीं

 हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना मुहम्मद ज़का-उल-हसन ने खुत्बा-ए-जुमा में तक़वा-ए-इलाही की अहमियत, उसके रूहानी और व्यावहारिक लाभ, ज़िंदगी में बरकत के कारणों तथा हज़रत इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम की दुआ-ए-मकारिमुल अख़लाक़ की व्याख्या की। इसके साथ ही उन्होंने हज़रत ज़ैनब कुबरा सलामुल्लाह अलैहा की सीरत, व्यक्तित्व, बसीरत, ईसार और कुर्बानी पर भी प्रकाश डाला।

16 अक्टूबर 2026 को मरकज़ी जामा मस्जिद महदिया, जामिया इल्मिया इमाम हसन अस्करी (अ.स.), घलवां अलीपुर में नमाज़-ए-जुमा हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना मुहम्मद ज़का-उल-हसन की इमामत में अदा की गई। मौलाना मुहम्मद ज़का-उल-हसन फ़ाज़िल-ए-क़ुम और जामिया इल्मिया इमाम हसन अस्करी (अ.स.) के प्रिंसिपल हैं।

खुत्बा-ए-जुमआ में धार्मिक एवं नैतिक प्रशिक्षण, तक़वा-ए-इलाही, ज़िंदगी की बरकतों और अहले बैत अलैहिमुस्सलाम की सीरत के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।

तक़वा-ए-इलाही और ज़िंदगी की बरकतें:

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना मुहम्मद ज़का-उल-हसन ने तक़वा-ए-इलाही की अहमियत और उसके प्रभावों पर विस्तार से बात की। इस दौरान हज़रत इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम की दुआ-ए-मकारिमुल अख़लाक़ के इस वाक्य की विशेष रूप से व्याख्या की गई:

«وَوَفِّرْ مَلَكَتِي بِالْبَرَكَةِ فِيهِ»

इसका भावार्थ है कि ऐ अल्लाह! मेरी क्षमताओं और सामर्थ्य को बरकत के माध्यम से बढ़ा दे।
मौलाना ने बरकत के अर्थ, उसके विभिन्न प्रकारों और इंसानी ज़िंदगी में उसकी अहमियत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बरकत केवल धन-दौलत की अधिकता तक सीमित नहीं है, बल्कि समय, रोज़ी, स्वास्थ्य, ज्ञान, पारिवारिक जीवन, सामाजिक संबंधों तथा धार्मिक और नैतिक चरित्र में भलाई और विकास का नाम भी है।

खुत्बे में क़ुरआन की आयतों और अहले बैत अलैहिमुस्सलाम की रिवायतों की रोशनी में उन कारणों की चर्चा की गई, जिनके परिणामस्वरूप किसी व्यक्ति, परिवार या समाज की ज़िंदगी में अल्लाह की बरकतें नाज़िल होती हैं। साथ ही उन कारणों को भी स्पष्ट किया गया, जिनकी वजह से इंसान अल्लाह की बरकतों से महरूम हो सकता है।

इस खुत्बे में व्यक्तिगत जीवन, घर-परिवार और समाज में बरकत के विषय को इस्लामी शिक्षाओं के परिप्रेक्ष्य में पेश किया गया, ताकि लोग अपनी व्यावहारिक ज़िंदगी का जायज़ा लें और उन सिद्धांतों को अपनाएँ, जो भलाई, अच्छे चरित्र और अल्लाह की प्रसन्नता का माध्यम बनते हैं।

बरकत केवल धन-दौलत की अधिकता का नाम नहीं, बल्कि ज़िंदगी के हर क्षेत्र में भलाई और विकास का नाम है।मौलाना मुहम्मद ज़का-उल-हसन

हज़रत ज़ैनब कुबरा (स.ल.) की सीरत, बसीरत, ईसार और कुर्बानी:

दूसरे खुत्बे में हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना मुहम्मद ज़का-उल-हसन ने अकीला-ए-बनी हाशिम हज़रत ज़ैनब कुबरा सलामुल्लाह अलैहा की पवित्र सीरत, व्यक्तित्व, बसीरत, ईसार, कुर्बानी, फ़ज़ाइल और उनके पवित्र कथनों को विषय बनाया।

उन्होंने हज़रत ज़ैनब कुबरा सलामुल्लाह अलैहा के व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए उनकी सीरत को धार्मिक चेतना, दृढ़ता, सब्र और सत्य की पहचान के लिहाज़ से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

मौलाना ने कहा कि हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा का जीवन और उनका चरित्र अहले बैत अलैहिमुस्सलाम की शिक्षाओं से जुड़ाव तथा हक़ और सच्चाई के रास्ते पर डटे रहने की एक उज्ज्वल मिसाल है।

खुत्बे में हज़रत ज़ैनब कुबरा सलामुल्लाह अलैहा के ईसार, कुर्बानी और बसीरत पर विशेष ध्यान दिया गया तथा उनकी सीरत से मार्गदर्शन प्राप्त करने की अहमियत को उजागर किया गया।

उन्होंने बताया कि विशेष रूप से नई पीढ़ी के लिए हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा के व्यक्तित्व का अध्ययन धार्मिक मूल्यों, नैतिक प्रशिक्षण, ज़िम्मेदारी की भावना और कठिन परिस्थितियों में दृढ़ता बनाए रखने के लिहाज़ से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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