एतेदाल;सोच-विचार और स्वतंत्रता सीरत-ए-नबवी स.अ.व.के महत्वपूर्ण सिद्धांत हैं

Rate this item
(0 votes)
एतेदाल;सोच-विचार और स्वतंत्रता सीरत-ए-नबवी स.अ.व.के महत्वपूर्ण सिद्धांत हैं

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन डॉ. रफीई ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफा स.अ.व. की सीरत के महत्वपूर्ण सिद्धांतों में संतुलन, बोलने और काम करने से पहले सोच-विचार करना, स्वतंत्रता तथा ईश्वरीय सीमाओं का पालन करना शामिल है। इन सिद्धांतों पर अमल करके हर दौर में इंसान अपनी जिंदगी को बेहतर, संतुलित और उद्देश्यपूर्ण बना सकता है।

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन डॉ. रफीई ने तेहरान में टेलीविजन कार्यक्रम ‘सिम्ते खुदा’ में बातचीत करते हुए कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम स.अ.व. और अहलेबैत (अ.स.) की सीरत का अनुसरण करने का अर्थ यह नहीं है कि 1400 साल पहले के जीवन के सभी तौर-तरीकों को आज के दौर में अपना लिया जाए, बल्कि इसका वास्तविक अर्थ उन नैतिक और मानवीय सिद्धांतों पर अमल करना है, जो हर युग में महत्वपूर्ण बने रहते हैं।

उन्होंने कहा कि अदब, हया, परिवार का सम्मान और दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार ऐसी नैतिक मूल्य हैं, जिनकी अहमियत कभी समाप्त नहीं होती।

जीवन के हर क्षेत्र में संतुलन जरूरी:

हुज्जतुल इस्लाम डॉ. रफीई ने संतुलन को सीरत-ए-नबवी (स.अ.व.) का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत बताते हुए कहा कि इंसान को जिंदगी के विभिन्न क्षेत्रों में अति और लापरवाही, दोनों से बचना चाहिए।

उन्होंने कहा कि परिवार में संतुलन का अर्थ है कि बच्चों से प्रेम किया जाए और उनकी ज़रूरतें पूरी की जाएं, लेकिन साथ ही धार्मिक और नैतिक सिद्धांतों का भी ध्यान रखा जाए। इसी तरह इबादत में व्यस्त रहने के कारण पत्नी और बच्चों के अधिकारों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।

सामाजिक संबंधों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि रिश्तेदारी और दोस्ती अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनके कारण न्याय और सिद्धांतों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। हज़रत अली (अ.स.) ने अपने भाई अकील को बैतुलमाल से उनके निर्धारित अधिकार से अधिक देने से इनकार कर दिया था। इससे यह शिक्षा मिलती है कि रिश्तों की मोहब्बत भी न्याय पर हावी नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि आर्थिक जीवन में भी संतुलन आवश्यक है। इंसान को अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए धन कमाना चाहिए, लेकिन दौलत की अत्यधिक मोहब्बत उसे अल्लाह से गाफिल न कर दे। इसी तरह इबादत का तरीका भी ऐसा होना चाहिए, जिससे दूसरों को परेशानी न हो।

बोलने और काम करने से पहले सोच-विचार करें:

हुज्जतुल इस्लाम डॉ. रफीई ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम (स.अ.व.) बेकार की बातचीत और व्यर्थ की बहसों से परहेज करते थे। इंसान को ऐसी बातों और बहसों में अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहिए, जिनसे कोई लाभ प्राप्त न हो।

उन्होंने कहा कि कोई बात कहने या काम करने से पहले उसके परिणामों पर विचार करना जरूरी है, क्योंकि जल्दबाजी में लिए गए फैसले बाद में पछतावे का कारण बन सकते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि खामोशी इंसान को सोचने का अवसर देती है। बुद्धिमान व्यक्ति पहले विचार करता है और उसके बाद बोलता है। धार्मिक शिक्षाओं में कायनात, प्रकृति, मानव जीवन और अपने कर्मों के परिणामों पर चिंतन करने की प्रेरणा दी गई है।

स्वतंत्रता और बेहतर जीवन की पांच विशेषताएं:

हुज्जतुल इस्लाम डॉ. रफीई ने स्वतंत्रता को सीरत-ए-नबवी (स.अ.व.) का एक अन्य महत्वपूर्ण सिद्धांत बताते हुए कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम (स.अ.व.) इंसानों को अनुचित प्रतिबंधों और गलत निर्भरताओं से मुक्त करना चाहते थे, ताकि वे अपनी इज्जत और गरिमा को बनाए रखते हुए सही रास्ते का चुनाव कर सकें।

उन्होंने इमाम जाफर सादिक अ.स.) की एक रिवायत का हवाला देते हुए बेहतर जीवन की पांच विशेषताएं बताईं:

वादा पूरा करना: अपने वादों को निभाने से लोगों के बीच विश्वास मजबूत होता है।

योजना और दूरदर्शिता: सही योजना बनाने से इंसान अपनी आमदनी और खर्चों को बेहतर ढंग से व्यवस्थित कर सकता है।

हया: हया परिवार और समाज में सम्मान बनाए रखने का माध्यम है।

हुस्ने-ज़न: दूसरों के बारे में अच्छा गुमान रखना और सकारात्मक सोच अपनाना।

स्वतंत्रता: अपनी गरिमा बनाए रखते हुए सही निर्णय लेने और उचित रास्ता चुनने की क्षमता।

उन्होंने जोर दिया कि इन सिद्धांतों के साथ ईश्वरीय सीमाओं का पालन, संतुलन और सोच-विचार को भी अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाना चाहिए, ताकि इंसान एक संतुलित, जिम्मेदार और उद्देश्यपूर्ण जीवन व्यतीत कर सके।

Read 1 times