हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन नासिर रफ़ीई ने कहा कि हज़रत फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा को क़ुरआन करीम में प्राप्त विशेष स्थान और अहले बैत अलैहिमुस्सलाम की सीरत की रौशनी में वे हर दौर की इंसानियत, विशेष रूप से महिलाओं और लड़कियों के लिए आदर्श हैं।
हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन नासिर रफ़ीई ने रविवार को टेलीविज़न कार्यक्रम ‘सिम्ते ख़ुदा’ में क़ुरआन करीम में महिलाओं के स्थान पर चर्चा करते हुए क़ुरआन में वर्णित कुछ महिलाओं का परिचय कराया और उनके जीवन से मिलने वाले नैतिक एवं शैक्षिक सबक़ बयान किए।
उन्होंने कहा कि क़ुरआन करीम में कई महिलाओं का उल्लेख किया गया है, जिनमें से प्रत्येक का जीवन इंसान के लिए आदर्श बन सकता है।
हज़रत फ़ातिमा ज़हेरा स.अ. के साझा और विशेष गुण:
हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन रफ़ीई ने हज़रत फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा के फ़ज़ाइल की दो श्रेणियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आपके कुछ फ़ज़ाइल पंजतन पाक यानी पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा स.अ.व. अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ.स.), इमाम हसन (अ.स.) और इमाम हुसैन (अ.स.) के साथ साझा हैं। इनमें आयते मुबाहिला और आयते ततहीर जैसी आयतें शामिल हैं, जो अहले बैत अलैहिमुस्सलाम के स्थान और महानता को बयान करती हैं।
उन्होंने कहा कि दूसरी श्रेणी में हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.अ.) के वे विशेष फ़ज़ाइल शामिल हैं, जिनका उल्लेख आयतों और रिवायतों में आपकी महान हस्ती के संबंध में किया गया है।
उन्होंने आगे कहा कि आपके विशेष फ़ज़ाइल में सूरह कौसर की आयत «إِنَّا أَعْطَيْنَاكَ الْكَوْثَرَ» की कुछ तफ़सीरों और रिवायती स्रोतों में हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स.अ.पर तातब़ीक़ भी शामिल है।
इसी तरह, अनेक रिवायतों में पैग़म्बरे इस्लाम (स.अ.व.) ने आपकी ख़ुशी और नाराज़गी को अपनी ख़ुशी और नाराज़गी, बल्कि अल्लाह तआला की ख़ुशी और नाराज़गी से जुड़ा हुआ बताया है। इसके अलावा रसूले ख़ुदा (स.अ.व.) का कथन «فَاطِمَةُ بَضْعَةٌ مِنِّي» यानी ‘फ़ातिमा मेरे अस्तित्व का हिस्सा हैं आपके विशेष स्थान और महानता को स्पष्ट करता है।
इस धार्मिक विद्वान ने कहा कि हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.अ.) के फ़ज़ाइल केवल शिया स्रोतों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अहले सुन्नत की किताबों में भी आपके गुणों और महानता के बारे में अनेक रिवायतें मौजूद हैं। अहले सुन्नत के कुछ विद्वानों ने आपके फ़ज़ाइल पर स्वतंत्र पुस्तकें भी लिखी हैं। मिस्र के प्रसिद्ध विद्वान जलालुद्दीन ने भी हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.अ.) के फ़ज़ाइल पर किताब लिखी है।
क़ुरआन में महिलाओं का उल्लेख और उनके जीवन से मिलने वाले सबक़:
हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन रफ़ीई ने कहा कि क़ुरआन करीम में विभिन्न महिलाओं का उल्लेख किया गया है। इनमें कुछ को नकारात्मक चरित्र के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जैसे अबू लहब की पत्नी तथा हज़रत नूह (अ.स.) और हज़रत लूत (अ.स.) की पत्नियाँ। इसके विपरीत, क़ुरआन में ऐसी महिलाओं का भी उल्लेख है, जिनका जीवन ईमान वालों के लिए सबक़ और मार्गदर्शन का स्रोत है।
उन्होंने कहा कि इन महान हस्तियों के जीवन का अध्ययन करने का उद्देश्य केवल उनके जीवन की घटनाओं से परिचित होना नहीं है, बल्कि उनके जीवन से नैतिक और प्रशिक्षण संबंधी सबक़ हासिल करना भी है।
डॉक्टर हुज्जतुल इस्लाम रफ़ीई ने हज़रत हव्वा (स.अ.) का उदाहरण देते हुए बताया कि अल्लाह तआला ने हज़रत आदम (अ.स.) और उनकी पत्नी को जन्नत में रहने का आदेश दिया था।
हज़रत आदम अ.स. और हज़रत हव्वा स.अ. द्वारा अपनी ग़लती को स्वीकार करते हुए यह कहना कि «رَبَّنَا ظَلَمْنَا أَنْفُسَنَا» यानी ‘ऐ हमारे परवरदिगार! हमने अपनी जानों पर ज़ुल्म किया’, इंसान को अपनी ज़िम्मेदारी स्वीकार करने और तौबा करने का सबक़ देता है।
उन्होंने आगे कहा कि इंसान को ग़लती करने के बाद अपने काम को सही साबित करने के बजाय अपनी कोताही स्वीकार करनी चाहिए और उसकी भरपाई के लिए व्यावहारिक क़दम उठाना चाहिए।
हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.अ.), कुरआनी शिक्षाओं की महान हस्तियों में से एक:
हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन रफ़ीई ने अपनी बातचीत के अंत में हज़रत फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा को क़ुरआनी शिक्षाओं में वर्णित महानतम महिलाओं में से एक बताते हुए कहा कि सूरह इंसान, जिसे सूरह हल अता भी कहा जाता है, उन सूरतों में शामिल है जिन्हें अहले बैत अलैहिमुस्सलाम, विशेष रूप से हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स.अ. अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ.स.), इमाम हसन (अ.स.) और इमाम हुसैन (अ.स.) की शान में नाज़िल होने वाली सूरतों में गिना जाता है।
उन्होंने कहा कि इसी वजह से हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.अ.) और अहले बैत अलैहिमुस्सलाम की सीरत ईमान, त्याग, ख़ुलूस और ज़रूरतमंदों की सेवा के क्षेत्र में एक बेहतरीन आदर्श है। उनकी ज़िंदगी से इंसानियत, परोपकार और दूसरों की मदद करने की प्रेरणा मिलती है।













