हज़रत फ़ातिमा ज़हेरा (स.ल.) का आचरण इलाही ज्ञान पर आधारित और मासूमियत से परिपूर्ण था

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हज़रत फ़ातिमा ज़हेरा (स.ल.) का आचरण इलाही ज्ञान पर आधारित और मासूमियत से परिपूर्ण था

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन हाशमी ने कहा कि हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (स.ल.) का व्यवहार और उनका प्रत्येक कार्य ईश्वरीय जागरूकता एवं ज्ञान पर आधारित था और वह मासूमियत से परिपूर्ण था। उनके ज्ञान और आध्यात्मिक मकाम की तुलना सामान्य लोगों से नहीं की जा सकती।

 हुज्जतुल इस्लाम सैयद मोहम्मद हाशमी ने बुधवार की शाम माको स्थित मदरसा इमाम ख़ुमैनी (रह.) के हुसैनिया में आयोजित विद्यार्थियों की नैतिकता संबंधी कक्षा में हज़रत फ़ातिमा ज़हेरा (स.ल.) के वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक मकाम पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि इमाम अली (अ.ल.) फ़रमाते हैं:

«لَا يُقَاسُ بِآلِ مُحَمَّدٍ مِنْ هَذِهِ الْأُمَّةِ أَحَدٌ»

अर्थात, इस उम्मत में कोई भी व्यक्ति आले-मोहम्मद (स.ल.) की बराबरी नहीं कर सकता। अहले-बैत (अ.स.) के वास्तविक मकाम को समझने के लिए उनकी विशिष्ट विशेषताओं और गुणों को जानना आवश्यक है।

उन्होंने सामान्य मनुष्यों के अर्जित ज्ञान और पैग़म्बरों एवं ईश्वरीय प्रतिनिधियों के ज्ञान के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि आम लोगों का ज्ञान मुख्य रूप से शिक्षा, अध्ययन और सीखने के माध्यम से प्राप्त होता है, जबकि पैग़म्बरों और अल्लाह के विशेष बंदों का ज्ञान ईश्वरीय ज्ञान से जुड़ा होता है, जिसे इल्मे-लदुन्नी कहा जाता है।

इसी संदर्भ में उन्होंने हज़रत आदम (अ.स.) और हज़रत ख़िज़्र (अ.स.) के बारे में क़ुरआन की आयतों का उल्लेख किया। हज़रत आदम (अ.स.) के संबंध में अल्लाह फ़रमाता है:

«وَعَلَّمَ آدَمَ الْأَسْمَاءَ كُلَّهَا»

अर्थात, “और अल्लाह ने आदम को सभी नामों का ज्ञान प्रदान किया।” (सूरह अल-बक़रा, 2:31)

इसी प्रकार हज़रत ख़िज़्र (अ.स.) के बारे में फ़रमाया गया है:

«وَعَلَّمْنَاهُ مِنْ لَدُنَّا عِلْمًا»

अर्थात,और हमने उसे अपने पास से विशेष ज्ञान प्रदान किया।(सूरह अल-कहफ़, 18:65)

हुज्जतुल इस्लाम हाशमी ने कहा कि इन आयतों से स्पष्ट होता है कि इल्मे-लदुन्नी वह ज्ञान है, जिसका स्रोत स्वयं अल्लाह की ओर से मिलने वाली शिक्षा है।

हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.ल.) के ज्ञान और मकाम का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी विशेषता यह है कि उनका व्यवहार और उनके कार्य ईश्वरीय ज्ञान एवं पहचान पर आधारित थे और वे मासूमियत के मकाम पर फ़ायज़ थीं। इसलिए उनके वैज्ञानिक और आध्यात्मिक मकाम की तुलना सामान्य मनुष्यों से नहीं की जा सकती।

उन्होंने आगे कहा कि ईश्वरीय ज्ञान से जुड़ा ज्ञान समय और स्थान की सीमाओं तक सीमित नहीं होता। हज़रत फ़ातिमा ज़हेरा (स.) के ज्ञान के संबंध में रिवायतों में उनके अतीत, वर्तमान और भविष्य से संबंधित जानकारी का उल्लेख मिलता है।

उन्होंने अमीरुल मोमिनीन इमाम अली (अ.स.) और हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.ल.) के बीच हुई बातचीत से संबंधित एक रिवायत का उल्लेख करते हुए उनके नूरानी और विशिष्ट ज्ञानपूर्ण मकाम पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अहले-बैत (अ.स.) की शिक्षाओं में हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.ल.) को एक विशेष और अद्वितीय मकाम प्राप्त है। उनके इस मकाम को समझने से विद्यार्थियों के दिलों में अहले-बैत (अ.) के प्रति ज्ञान, प्रेम और श्रद्धा में वृद्धि हो सकती है।

अंत में इमाम ए जुमआ माको ने विद्यार्थियों को अहले-बैत (अ.स.) की शिक्षाओं से लाभ उठाने की नसीहत करते हुए कहा कि धार्मिक शिक्षा प्राप्त करना केवल हौज़वी उलेमा हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ ज्ञान, आत्मशुद्धि, तक़वा और अहले-बैत (अ.स.) की सीरत से गहरा संबंध भी आवश्यक है। ज्ञान तभी मूल्यवान और प्रभावशाली बनता है, जब उसका उपयोग ईश्वरीय मार्ग पर चलने और समाज का मार्गदर्शन करने के लिए किया जाए।

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