ईरान की जनता अमेरिका के धोखे में आने वाली नहीं हैः

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ईरान की जनता अमेरिका के धोखे में आने वाली नहीं हैः

हरान के अस्थायी इमाम ए जुमआ ने जुमआ की नमाज़ के खुतबे में कहा कि अमेरिका बार-बार बातचीत की बात कर रहा है, पत्र भेज रहा है और मध्यस्थों के माध्यम से संपर्क करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ईरानी जनता उसकी इन चालों में आने वाली नहीं है।

तेहरान के अस्थायी इमाम ए जुमा हुज्जतुल इस्लाम मोहम्मद जवाद हाज अली अकबरी ने जुमे की नमाज के खुतबे में कहा कि अमेरिका बार-बार बातचीत की बात कर रहा है, पत्र भेज रहा है और मध्यस्थों को भेजकर संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ईरानी जनता उसकी चालों और धोखे में आने वाली नहीं है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अतीत में ईरान के साथ कई वादे किए और उन्हें तोड़ा है। ईरानी जनता अमेरिका की पुरानी वादाखिलाफी को अभी भूली नहीं है। इसलिए जब भी अमेरिका बातचीत की पेशकश करता है तो उसके पीछे छिपी संभावित साजिशों के प्रति सतर्क रहना जरूरी है। उन्होंने जनता से दुश्मन की चालों को समझने और पूरी तरह होशियार रहने की अपील की।

हुज्जतुल इस्लाम हाज अली अकबरी ने पवित्रता, शालीनता और हया के विषय पर कहा कि इंसान के व्यक्तित्व की बुनियाद पाकीजगी और आत्मसंयम पर आधारित होती है। जब इंसान अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखता है तो वह अच्छाइयों और नैतिक मूल्यों की ओर आगे बढ़ता है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में परिवार व्यवस्था को कमजोर करने और अश्लीलता को बढ़ावा देने की कोशिशें हो रही हैं, जिससे समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि पवित्र और मर्यादित जीवन केवल एक नैतिक उपदेश नहीं, बल्कि स्वस्थ और आदर्श समाज की बुनियाद है। जिस समाज में हया और नैतिकता का महत्व अधिक होगा, वहां पारिवारिक और सामाजिक जीवन भी बेहतर होगा। बच्चों को बचपन से ही पवित्रता और अच्छे संस्कारों की शिक्षा दी जानी चाहिए। इसमें माता-पिता और शैक्षणिक संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पवित्रता और आत्मसंयम किसी पर जबरदस्ती थोपी जाने वाली चीज नहीं है, बल्कि यह इंसान के भीतर से पैदा होने वाला नैतिक गुण है। कानून की भूमिका उन लोगों के लिए होती है जो मर्यादा और सामाजिक व्यवस्था से भटक जाते हैं।

ईरानी युवाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दुश्मन देखेगा कि ईरान के नौजवान शहीदों के रास्ते पर चलने और उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने बताया कि सर्वोच्च नेता ने पिछले 40 दिनों के दौरान युवाओं के संबंध में तीन महत्वपूर्ण संदेश दिए हैं, जो देश की प्रगति और भविष्य की दिशा निर्धारित करने में मार्गदर्शक हैं।

उन्होंने कहा कि अमेरिका पिछले 70 वर्षों से ईरान के खिलाफ साजिशें करता आ रहा है। ईरान के सामने सीधे आकर मुकाबला करने की अमेरिकी कोशिश उसकी ताकत नहीं, बल्कि उसकी कमजोरी को दर्शाती है। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका की ओर से बातचीत की पेशकश के पीछे खतरे और साजिशें छिपी हो सकती हैं। इसलिए ईरान के सैन्य बल पूरी तरह सतर्क हैं और जनता भी हर परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार है।

परमाणु सिद्धांत में बदलाव की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि यह मांग केवल भावनाओं का परिणाम नहीं, बल्कि जनता की समझदारी और सोच का नतीजा है। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी 70 प्रतिशत से अधिक लोगों ने इस विचार का समर्थन किया था।

इस विषय पर विशेषज्ञों और संबंधित अधिकारियों को गंभीरता से विचार-विमर्श करके अपने सुझाव सर्वोच्च नेता के समक्ष प्रस्तुत करने चाहिए। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च नेता जो भी निर्णय लेंगे, हम सभी उसका पालन करेंगे।

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