लेबनान की मुस्लिम विद्वानों की परिषद ने अमेरिका में हुए मध्यावधि चुनाव के परिणामों के संबंध में एक बयान जारी किया है। परिषद ने इन नतीजों को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पार्टी की स्पष्ट राजनीतिक हार क़रार देते हुए कहा है कि ये परिणाम ट्रंप की नीतियों के विरुद्ध जनता के व्यापक विरोध को दर्शाते हैं।
लेबनान की मुस्लिम विद्वानों की परिषद ने अपने बयान में कहा है कि अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में प्रतिनिधि सभा और सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी की सफलता वास्तव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पार्टी की स्पष्ट राजनीतिक हार है। ये परिणाम देश के प्रशासनिक मामलों और दुनिया के साथ संबंधों के मामले में ट्रंप की शासन-शैली के प्रति जनता की नाराज़गी को दर्शाते हैं।
अमेरिकी मतदाताओं ने ट्रंप को नकारकर युद्धोन्माद और ब्लैकमेल की नीतियों को खारिज कर दिया।
लेबनान की मुस्लिम विद्वानों की परिषद ने इन चुनावी नतीजों को ऐसी सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश क़रार दिया, जो धमकियों और ब्लैकमेल का इस्तेमाल करने में हद से आगे बढ़ चुकी है और युद्धों को विभिन्न राष्ट्रों पर अपनी इच्छा थोपने का माध्यम समझती है। उसे इन युद्धों के परिणामस्वरूप पैदा होने वाली मानवीय त्रासदियों और आम जनता पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ की कोई परवाह नहीं है।
बयान में आगे कहा गया है कि ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट इस सच्चाई की पुष्टि करती है कि सैन्य शक्ति का प्रदर्शन हमेशा असफल नीतियों के परिणामों को छिपा नहीं सकता। राष्ट्र अपने शासकों से शांति, स्थिरता और बेहतर जीवन स्तर की अपेक्षा करते हैं। जब शासक देश के संसाधनों को विदेशों में सैन्य अभियानों पर खर्च करते हैं, तो जनता उनसे जवाबदेही की माँग करती है।
इसलिए इन चुनावी नतीजों की माँग है कि अमेरिकी नीतियों की गंभीरता से समीक्षा की जाए, क्योंकि अमेरिका क्षेत्र में तनाव बढ़ाने और लेबनान तथा फ़िलिस्तीन के विरुद्ध ज़ायोनी शासन की आक्रामकता जारी रखने के लिए आवश्यक राजनीतिक एवं सैन्य समर्थन प्रदान करने में भूमिका निभाता रहा है।
लेबनान की मुस्लिम विद्वानों की परिषद ने अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी को बहुमत हासिल करने में मिली नाकामी को ट्रंप की नीतियों के विरुद्ध जनता की प्रतिक्रिया और इस दावे के अंत के रूप में देखा कि उन्हें अमेरिका और दुनिया को और अधिक युद्धों एवं संकटों में धकेलने का पूरा अधिकार प्राप्त है।
लेबनान की मुस्लिम विद्वानों की परिषद ने अमेरिकी सरकार से माँग की कि वह अपने मतदाताओं के संदेश का सम्मान करे और तनाव बढ़ाने तथा दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने की नीतियों की वास्तविक समीक्षा करे।
अमेरिकी जनता के युद्ध-विरोधी संदेश पर ईरानी संसद के अध्यक्ष के रुख़ का समर्थन
लेबनान की मुस्लिम विद्वानों की परिषद ने इस्लामी गणराज्य ईरान की संसद के अध्यक्ष मुहम्मद बाक़िर क़ालीबाफ़ के इस बयान का समर्थन किया कि "अमेरिकी जनता ने युद्ध को खारिज कर दिया है।"
परिषद के अनुसार, यह विचार इस सच्चाई को दर्शाता है कि राष्ट्रों के साझा हित युद्धों से दूर रहने, मानव जीवन की रक्षा करने तथा राष्ट्रीय संसाधनों का इस्तेमाल विकास और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने के लिए करने में निहित हैं।













